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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भिलाई नगर, 20 नवंबर। गुरुवार सुबह दुर्ग जिले के बोरी थाना क्षेत्र के डोमा में किसान ने खेत में लगे पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या का कारण परिजन, पुलिस एवं जिला प्रशासन अभी तक नहीं बता पाए हैं। बोरी पुलिस जांच कर रही है। नायब तहसीलदार अखिलेश ने बताया कि इस वर्ष मृतक के पिता ने 50 हजार का कर्ज बोरी सहकारी समिति से लिया है।
मृतक किसान प्रेम लाल साहू पिता धनीराम साहू (35) निवासी ग्राम डोमा बुधवार की रात 10 बजे खाना खाने के बाद सो गया था। सुबह 5 बजे रोज की तरह खेत में काम करने निकला था, परंतु गांव के ही भरत वर्मा के खेत में लगे बबूल के पेड़ पर उसका शव लटकते हुए खेत जा रहे दूसरे किसान मोतीलाल ने सुबह 6.30 बजे के करीब देखा था। मोतीलाल ने इसकी सूचना ग्राम पंच को दी। पंच के द्वारा मृतक किसान प्रेम लाल साहू के पिता को घटना की जानकारी दी। इस पर पिता के द्वारा सुबह 8.30 बजे के लगभग थाना बोरी को अवगत कराया।
बोरी क्षेत्र के नायब तहसीलदार अखिलेश ने बताया कि जांच के दौरान मृतक के पिता धनीराम के द्वारा उन्हें दिए बयान में उल्लेखित किया है कि उसके पास कुल 9 एकड़ 38 डिसमिल खेत है, जिसमें से 6 एकड़ खेत 4 पुत्रों में बराबर डेढ़-डेढ़ एकड़ मौखिक रूप से बांट दी है। दस्तावेजों में विभाजन नहीं हुआ है। पहली बार धनीराम के द्वारा 50,000 का कर्ज लिया गया है। धनीराम ने पुलिस को बताया कि घर बनाने के लिए उसके द्वारा प्रेम लाल को 50,000 रुपये दिए गए थे।
मृतक किसान के छोटे भाई संदीप ने बताया कि उसके बड़े भाई द्वारा आत्महत्या किए जाने के कारण सभी अचंभित हैं, उसके तीन छोटी-छोटी बच्चियां हैं। एक सातवीं कक्षा में, एक चौथी कक्षा में एवं 8 माह की बच्ची है।
बोरी पुलिस ने बताया कि किसान द्वारा की गई आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है, उसकी पत्नी रामेश्वरी बाई (32 वर्ष) से भी बयान लिया गया है। जिस पर कोई कारण सामने नहीं आया है।
एसडीएम धमधा बृजेश सिंह क्षत्रिय ने बताया कि मृतक किसान प्रेम लाल साहू को मौखिक रूप से उसके पिता द्वारा 1.30 एकड़ खेत दिया गया है। किसान का ग्रामीण बैंक में खाता है। जिसमें 1,150 हजार जमा है। उसके द्वारा किसी भी सहकारी बैंक अथवा बैंक या सोसाइटी से कर्ज नहीं लिया गया था। आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण प्रज्ञा मेश्राम ने बताया कि किसान द्वारा आत्महत्या क्यों की गई, इसकी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में किसान के ऊपर कर्ज था, यह स्पष्ट नहीं हो सका है।


