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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 21 अक्टूबर। विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव पर राजभवन से टकराव की चर्चाओं के बीच संसदीय कार्यमंत्री रविन्द्र चौबे बुधवार को राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके से मुलाकात की। बताया गया कि श्री चौबे ने उन्हें विधानसभा में लाए जाने वाले विधेयकों की विस्तार से जानकारी दी है। राज्यपाल से सत्र बुलाने की मंजूरी मिल गई है, और देर शाम तक विधिवत अधिसूचना भी जारी हो सकती है।
श्री चौबे ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि वे राज्यपाल से सौजन्य मुलाकात के लिए गए थे। इस दौरान सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा हुई है। उन्होंने राजभवन से टकराव की चर्चाओं को साफ तौर पर खारिज किया। संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि विशेष सत्र के दौरान विधिक विषयक कार्यों को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई है।
सूत्र बताते हैं कि राज्यपाल ने विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव पर सहमति दे दी है, और विधानसभा सचिवालय विधिवत अधिसूचना जारी करने की तैयारी में है। विधानसभा का सत्र 26 और 27 अक्टूबर को होगा। सत्र के दौरान सरकार केन्द्रीय कृषि कानूनों से अलग हटकर नया कानून बनाने जा रही है। ताकि किसानों के हितों की रक्षा हो सके और केन्द्र सरकार के साथ टकराव भी न हो।
पंजाब सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दर पर उपज की खरीदी पर सजा का भी प्रावधान रखा है। यह विधेयक विवादों में घिर गया है, और इसका राज्यपाल से मंजूरी मिलने की संभावना नहीं हैं। छत्तीसगढ़ सरकार विधेयकों को लेकर ऐसा कुछ नहीं करना चाहती, जिससे कानूनी अड़चन पैदा हो, और विधेयक खटाई में पड़ जाए। मसलन, मंडी को लेकर राज्य सरकार को काफी अधिकार है। सरकार मंडी कानून में संशोधन कर सकती है, ताकि किसानों को उपज की बेहतर कीमत मिल सके।
उल्लेखनीय है कि राजभवन ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव पर सरकार से जानकारी मांगी है। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने पूछा था कि सत्र के दौरान कौन-कौन से शासकीय विधि विषयक कार्य होंगे? बाद में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने साफ किया कि पूर्ण बहुमत की सरकार है, और विधानसभा का सत्र बुलाने से कोई नहीं रोक सकता। मुख्यमंत्री के बयान के बाद राजभवन और सरकार के बीच टकराव के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन संसदीय कार्यमंत्री से चर्चा के बाद राज्यपाल ने अपनी सहमति दे दी।


