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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 20 अक्टूबर। पूर्व संसदीय सचिव युद्धवीर सिंह जूदेव के उस पत्र पर सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसमें उन्होंने धर्म परिवर्तन करने वाले आदिवासियों की जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने की मांग की है। सरकार ने जूदेव को लिखा है कि उनकी मांग विधि सम्मत नहीं है।
जूदेव परिवार आपरेशन घर वापसी को लेकर सुर्खियों में रहा है। इसमें वे धर्म परिवर्तन कर चुके आदिवासियों को फिर से हिन्दू धर्म में लाने के लिए अभियान चलाते रहे हैं। दिवंगत पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिलीप सिंह जूदेव इसको लेकर काफी सक्रिय रहे हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री के गुजरने के बाद उनके पुत्र युद्धवीर सिंह और प्रबल प्रताप सिंह, आदिवासियों की घर वापसी के अभियान में जुटे हुए हैं।

पूर्व संसदीय सचिव युद्धवीर सिंह जूदेव ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा कि ऐसे आदिवासी, जिन्होंने धर्म परिवर्तन कर ईसाई या अन्य दूसरे धर्म को अपना लिया है, ऐसे लोगों का जाति प्रमाण पत्र निरस्त किया जाना चाहिए। युद्धवीर दो बार चंद्रपुर से विधायक रह चुके हैं। सरकार ने जूदेव को चिट्ठी लिखकर ऐसा करने से मना कर दिया है।
दूसरी तरफ, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष नंदकुमार साय ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि धर्मांतरण को लेकर केन्द्र का कानून भी है। यदि अनुसूचित जाति का कोई व्यक्ति धर्मांतरण करता है, तो उस वर्ग को मिलने वाली सुविधाएं नहीं मिलती है। मगर अनुसूचित जनजाति वर्ग के मामले में ऐसा कोई कानून नहीं है। उन्होंने कहा कि आदिवासी नेता कार्तिक उरांव इसके लिए लड़ाई भी लड़ते रहे हैं। आदिवासी वर्ग के लिए भी धर्मांतरण को लेकर कानून बनना चाहिए।


