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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 20 अक्टूबर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को यहां कहा कि छत्तीसगढ़ में गन्ने और धान से एथेनाल बनाया जाएगा। चार-छह कंपनियों के साथ एमओयू हो चुका है, और सालभर में उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। श्री बघेल ने कहा कि डेढ़ साल पहले राज्य सरकार ने बचत धान के एथेनाल बनाने का प्रस्ताव दिया था, तब इसका विरोध किया गया, और यहां तक कहा गया कि इस योजना के लिए भूपेश सरकार को नोबल पुरस्कार मिलना चाहिए। अब केन्द्र सरकार इस पर अमल कर रही है, तो विरोध करने वाले श्रेय लूटने के चक्कर में हैं।
श्री बघेल ने राजीव भवन में पत्रकारों से चर्चा में कहा कि केन्द्रीय कृषि मंत्री संजीव बालियान कृषि कानूनों पर बहस की चुनौती दी थी, जिसे तुरंत स्वीकार कर लिया गया था। सरकार के मंत्री मोहम्मद अकबर ने स्थान और समय तय करने के लिए कहा था। उन्होंने कृषि कानूनों की एक बार फिर खिलाफत की, और कहा कि यह कानून पूंजीपतियों को लाभ देने का कानून है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्रीय कृषि मंत्री ने पहली बार माना है कि धान खरीद की व्यवस्था एफसीआई करती है, और राज्य सरकार एजेंसी के रूप में काम करती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एजेंसी है, तो अनाज खरीदने में कैप क्यों लगाया जा रहा है, बचत धान कहां जाएगा? मोदी सरकार ने बोनस देने पर रोक लगा दी थी, और अधिक धान लेने से मना कर दिया था। सिर्फ एक बार बोनस देने की छूट दी गई, तब सरकार ने 25 सौ रूपए क्विंटल में धान खरीदी की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक परिस्थितियां ऐसी है कि यहां धान के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। धान के उपयोग को लेकर फरवरी-2019 में कार्यशाला का आयोजन किया था। तब हमने मांग की थी कि धान से एथेनाल बनाने की अनुमति दी जाए। अब जाकर केन्द्र ने इसे माना है, और 54 रूपए प्रति लीटर दर तय किया है। हमारे प्रयासों को सफलता मिली है।
कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सवा करोड़ टन धान का उत्पादन होता है। पीडीएस व अन्य योजनाओं के लिए 46 लाख टन धान एफसीआई लेती है। इस साल पांच-छह लाख टन धान अतिरिक्त खपत हुई है। उन्होंने कहा कि एफसीआई को राज्य में खरीफ और रबी का धान खरीदने के लिए अधोसंरचना विकसित करनी चाहिए। खाद्य मंत्री अमरजीत भगत और मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा ने भी अपने विचार रखे।


