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आदिवासी भाजपा नेता संजीव शाह रमन के साथ
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 20 अक्टूबर। मरवाही उपचुनाव के बीच पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी के सुपुत्र अमित जोगी व बहू ऋचा जोगी के अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र को अमान्य किए जाने के सरकारी फैसले पर मचे कोहराम पर राजनांदगांव जिले के भाजपा के बड़े आदिवासी नेता संजीव शाह ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से सवाल करते पूछा कि जोगी के सरकार में मंत्री रहते उन्हें असली-नकली आदिवासी होना क्यों नजर नहीं आया। भाजपा शुरू से जोगी की जाति की वैधता को लेकर सवाल उठाती रही है। भाजपा ने स्व. जोगी को कभी भी असली आदिवासी नही माना।
‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा करते पूर्व संसदीय सचिव शाह ने पूर्व सीएम रमन के उस बयान का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने जाति प्रमाण-पत्र को अवैध करार देने के निर्णय का विरोध किया है। श्री शाह ने कहा कि पूर्व सीएम का इस बयान के पीछे सोच यह है कि जाति को अवैध ठहराकर जोगी कुनबे को चुनाव लडऩे से रोकने की साजिश की जा रही है, जो कि लोकतंत्र के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि नकली आदिवासी के मुद्दे पर भाजपा का रूख आज भी साफ है। जबकि राज्य के मुख्यमंत्री श्री बघेल जोगी के मंत्रिमंडल में सदस्य थे। जोगी की जाति को लेकर उस समय उन्होंने सवाल क्यों नहीं उठाया।
हालांकि श्री शाह ने कहा कि आदिवासी नहीं होने के प्रशासनिक निर्णय से यह स्पष्ट हो गया कि जोगी परिवार गैर आदिवासी है। यह एक अच्छा फैसला है।
श्री शाह ने कहा कि रमन सिंह के बयान को समझने की जरूरत है। गौरतलब है कि श्री शाह रमन सरकार के पहले कार्यकाल में ‘आदिवासी एक्सप्रेस’ में सवार हुए थे। दिग्गज आदिवासी नेता ननकीराम कंवर की अगुवाई में भाजपा के कई विधायक रमन सिंह के खिलाफ लामबंद होकर दिल्ली तक पहुंच गए थे। पार्टी आलाकमान ने इस मुहिम को दरकिनार कर दिया। इसके बाद रमन सरकार के दूसरे कार्यकाल में विरोधी विधायकों का पत्ता साफ कर दिया। जिसमें संजीव शाह भी शामिल थे। करीब डेढ़ दशक से शाह वनांचल की राजनीति में दोबारा पैर जमाने के लिए जोर लगा रहे हैं।
माना जाता है कि रमन से नाराजगी मोल लेने के कारण 2008, 2013 और 2018 के तीनों विस चुनाव में पार्टी ने नए चेहरे दरबार सिंह मंडावी, भोजेश शाह और कंचनमाला भुआर्य को मैदान में उतारा। तीनों को वनांचल की जनता ने नकार दिया। आज पर्यन्त भाजपा को सिलसिलेवार हार का सामना करना पड़ा है। शाह का पूर्व सीएम रमन सिंह के प्रति उदार बयान को लेकर सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।


