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उपकरण-खरीदी भ्रष्टाचार की भी जांच शुरू
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 4 सितंबर। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए उपकरणों की खरीदी में भ्रष्टाचार के मामले की पड़ताल शुरू हो गई है। शुक्रवार को चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉ. एसएल आदिले को जांच समिति के सामने हाजिर होना था, लेकिन वे नहीं आए। डॉ. आदिले रेप का आरोप है और वे फरार हैं। खास बात यह है कि उपकरणों की खरीदी भी डॉ. आदिले के बेटे के फर्म से की गई थी।
चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉ. आदिले पर एक महिला कर्मचारी ने रेप का आरोप लगाया है। इसके बाद से वे फरार हैं। उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए जिला अदालत में याचिका दायर की है, जिस पर अभी सुनवाई नहीं हुई है। डॉ. आदिले पर अपने ही बेटे की फर्म से कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए उपकरणों की खरीदी का आरोप है।
सरकार ने इसकी जांच के लिए 3 सदस्यीय समिति बनाई है। जिसमें अवर सचिव राजीव अहिरे, संयुक्त संचालक बसंत महेश्वरी और उप संचालक रत्ना अजगले भी हैं। शुक्रवार को सुबह 10 बजे डॉ. आदिले को जांच समिति के समक्ष हाजिर होने के लिए नोटिस जारी की गई थी, लेकिन वे नहीं आए।
उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के रोकथाम के लिए जो समिति बनी हुई थी उसके अध्यक्ष खुद आदिले थे। इसके अलावा अतिरिक्त संचालक डॉ. निर्मल वर्मा, डॉ. ओपी सुंदरानी सहायक प्राध्यापक और रत्ना अजगले भी थे। खास बात यह है कि ये सारे अफसर डॉ. आदिले के मातहत ही काम करते रहे हैं। इनमें से रत्ना अजगले तो उपकरणों की खरीदी की समिति में भी थी। कुल मिलाकर इस जांच समिति को लेकर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
अग्रिम जमानत याचिका खारिज
रेप के आरोपी डॉ. आदिले की जमानत याचिका पर शुक्रवार को जिला अदालत में सुनवाई हुई। न्यायाधीश सुश्री पूजा जायसवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका खारिज कर दी। पीडि़त महिला ने डॉ. आदिले को जमानत देने का विरोध किया है। उन्होंने आपत्ति भी लगाई थी जिसमें डॉ. आदिले के खिलाफ चल रहे प्रकरणों का ब्यौरा भी था।


