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बाल से घसीटकर, दौड़ाकर ‘अपना घर’ से पुलिस की मदद से निकाला गया एड्स पीडि़त बच्चियों को
17-Aug-2020 3:15 PM
बाल से घसीटकर, दौड़ाकर ‘अपना घर’ से पुलिस की मदद से निकाला गया एड्स पीडि़त बच्चियों को

अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला के साथ मारपीट, पतलून उतारने की कोशिश, पुलिस अपने साथ ले गई 

राजेश अग्रवाल
बिलासपुर, 17 अगस्त (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)।
अमेरी स्थित एड्स पीडि़ता बालिकाओं के आश्रम में आज पुलिस फोर्स के साथ पहुंचकर सभी बच्चियों को बल प्रयोग करके निकाला गया और पुलिस की गाड़ी में भरकर अलग जगह पर पहुंचा दिया गया। इन बच्चियों के साथ मारपीट करने, दौड़ाकर पकडऩे, बाल खींचकर घसीटने की बात सामने आई है। इनकी पैरवी करने वाली हाईकोर्ट अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला के साथ भी मारपीट की गई और उनके कपड़े खींचे गए। पुलिस के बर्ताव को बड़ी संख्या में आसपास के लोगों ने देखा है और उनमें इस घटना से दहशत व्याप्त है। 

सुबह करीब 11 बजे पुलिस की टीम के साथ महिला बाल विकास विभाग के बिलासपुर व विभिन्न जिलों के करीब 10 जिलों के अधिकारी पहुंचे। इनकी संख्या 15-16 थी। प्रत्यक्षदर्शियों व छात्रावास के स्टाफ के मुताबिक वे सीधे आश्रम के भीतर घुसे। इनमें जिला बाल विकास अधिकारी सुरेश सिंह और परियोजना अधिकारी पार्वती वर्मा को स्टाफ पहचान रहे थे। 

उन्होंने बताया कि सभी बच्चों को कलेक्टर के आदेश पर बाहर निकालकर ले जाना है। स्टाफ ने ऑर्डर दिखाने कहा। अपना घर आश्रम की अधीक्षिका दीपिका सिंह के मुताबिक एक कागज उन्हें लहराकर दिखाया गया पर उन्हें पढऩे नहीं दिया गया। सभी बच्चों से कहा गया कि बाहर निकलें। बच्चे निकलने के लिये तैयार नहीं हुए तो बल प्रयोग शुरू हो गया। 

अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला के साथ मारपीट, पतलून उतारने की कोशिश, पुलिस अपने साथ ले गई राजेश अग्रवाल बिलासपुर, 17 अगस्त (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। अमेरी स्थित एड्स पीडि़ता बालिकाओं के आश्रम में आज पुलिस फोर्स के साथ पहुंचकर सभी बच्चियों को बल प्रयोग करके निकाला गया और पुलिस की गाड़ी में भरकर अलग जगह पर पहुंचा दिया गया। इन बच्चियों के साथ मारपीट करने, दौड़ाकर पकडऩे, बाल खींचकर घसीटने की बात सामने आई है। इनकी पैरवी करने वाली हाईकोर्ट अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला के साथ भी मारपीट की गई और उनके कपड़े खींचे गए। पुलिस के बर्ताव को बड़ी संख्या में आसपास के लोगों ने देखा है और उनमें इस घटना से दहशत व्याप्त है। सुबह करीब 11 बजे पुलिस की टीम के साथ महिला बाल विकास विभाग के बिलासपुर व विभिन्न जिलों के करीब 10 जिलों के अधिकारी पहुंचे। इनकी संख्या 15-16 थी। प्रत्यक्षदर्शियों व छात्रावास के स्टाफ के मुताबिक वे सीधे आश्रम के भीतर घुसे। इनमें जिला बाल विकास अधिकारी सुरेश सिंह और परियोजना अधिकारी पार्वती वर्मा को स्टाफ पहचान रहे थे। उन्होंने बताया कि सभी बच्चों को कलेक्टर के आदेश पर बाहर निकालकर ले जाना है। स्टाफ ने ऑर्डर दिखाने कहा। अपना घर आश्रम की अधीक्षिका दीपिका सिंह के मुताबिक एक कागज उन्हें लहराकर दिखाया गया पर उन्हें पढऩे नहीं दिया गया। सभी बच्चों से कहा गया कि बाहर निकलें। बच्चे निकलने के लिये तैयार नहीं हुए तो बल प्रयोग शुरू हो गया। वहां अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला पहले से मौजूद थीं। उन्होंने विरोध किया और कहा कि बिना किसी कानूनी आदेश के वे इन बच्चों को नहीं ले जा सकते। सबसे पहले वहां मौजूद महिला पुलिस व लाल रंग की यूनिफॉर्म पहने लोग प्रियंका पर ही टूट पड़े उसे मुक्कों से मारा गया, बाल खींचा गया। दीपिका सिंह बताती है कि एक महिला स्टाफ ने उसकी जींस (पतलून) भी खीचने की कोशिश की। घबराई प्रियंका ने एक कमरे में बंद होने की कोशिश की तो उसे खींचकर बाहर निकाला गया। उसे पुलिस की जीप में बिठा दिया गया। वहां पहुंचे उसके पति अनुज श्रीवास्तव के साथ भी दुव्र्यवहार किया गया। अनुज ने दोपहर करीब दो बजे बताया कि प्रियंका कहां है, उन्हें पता नहीं। पुलिस उन्हें कुछ बता नहीं रही है। इस बीच बाकी स्टाफ बच्चों की तरफ मुड़े। बच्चों ने रोते हुए अपने आपको छुड़ाया तो उनसे भी मारपीट की गई। घटनास्थल पर चूडिय़ां, स्कार्फ आदि फर्श पर बिखरे मिले। खून का एक हल्का सा धब्बा भी मिला। दीपिका सिंह के मुताबिक बच्चों को खींच-खींचकर निकाला गया। कुछ बच्चियां आश्रम से निकलकर भागने लगीं तो उन्हें सौ मीटर तक दौड़ाकर पुलिस ने पकड़ लिया। इस सभी कार्रवाई की जब वीडियो, फोटो खींचे जाने लगा तो पुलिस ने सबका मोबाइल फोन जब्त कर लिया। बाद में निकलते समय वापस किया गया। इनमें अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला का मोबाइल फोन भी शामिल है। अपना घर आश्रम के ठीक सामने रहने वाले विकास और उसके परिवार वालों ने बताया कि जब वह मोबाइल पर घटना की फोटो खींचने और वीडियो बनाने लगा तो उसे पुलिस वाले ने दौड़ाया। वह घबराकर घर के भीतर घुस गया। पुलिस ने बाहर से ही आवाज देकर कहा कि मोबाइल फोन लाकर दो। विकास ने फोन नहीं दिया पर वीडियो भी नहीं बना पाया। वह घर के भीतर दुबका रहा। IFrame भागती हुई एक बच्ची के साथ पुलिस के बर्ताव को देखकर एक महिला ने उन्हें रोका तो उसे भी चुपचाप चले जाने के लिये कहा गया। ‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता जब अपना घर की ओर जाने लगा तो एक जीप पर कुछ बच्चियां रोती हुई मिली। उन्हें एक पुलिस अधिकारी समझा रही थी कि नई जगह पर चलो, तुम सब वहां अच्छे से रहोगे। एक दूसरी जीप वाले को बताया गया कि सबको सरकंडा स्थित निवेदिता हॉस्टल लेकर जाना है। पुलिस और विभाग के अधिकारियों के दल के जाने के बाद आसपास के घरों से निकली महिलाओं, बच्चों में दहशत का माहौल व रोष है। उन्होंने बताया कि बच्चियों के साथ इतना क्रूर व्यवहार किया गया जिसे देखकर वे दहल उठीं। एक और महिला ने बताया कि उसने बाहर निकले एक पुलिस वाले से कहा कि जब बच्चे नहीं जाना चाह रहे हैं तो जबरन ऐसा क्यों कर रहे हैं, पुलिस ने कहा कि सरकारी काम में बाधा मत डालो, अंदर चले जाओ। ज्ञात हो कि ‘अपना घर’ प्रदेश का एकमात्र एड्स पीडि़तों की देखभाल के लिये खोला गया आश्रम है, जिसे प्रवीण खट्टर, उनकी पत्नी और उनकी बेटी चलाती है। यह समाजसेवियों के अनुदान से चलता है। खट्टर ने महिला बाल विकास विभाग में अनुदान के लिये आवेदन लगाया था। इसके बाद अनुदान तो स्वीकृत हो गया पर खट्टर के आरोपों के मुताबिक उससे 30 प्रतिशत रिश्वत मांगी गई। रिश्वत देने से मना करने की वजह से ही यह सब कार्रवाई हुई है, क्योंकि आश्रम चलता रहता तो उन्हें अनुदान नहीं देने का कारण बताना पड़ता। इस मामले में वे लड़ाई लगेंगे। वहां से निकलते समय महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने सारे रजिस्टर, दस्तावेज, आय व्यय का ब्यौरा दफ्तर में लाकर देने के लिये कहा है। खट्टर को आशंका है कि अपना पक्ष मजबूत करने के लिये उनके व यहां के स्टाफ के खिलाफ झूठे आरोप बच्चियों से लगवाये जा सकते हैं।

वहां अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला पहले से मौजूद थीं। उन्होंने विरोध किया और कहा कि बिना किसी कानूनी आदेश के वे इन बच्चों को नहीं ले जा सकते। सबसे पहले वहां मौजूद महिला पुलिस व लाल रंग की यूनिफॉर्म पहने लोग प्रियंका पर ही टूट पड़े उसे मुक्कों से मारा गया, बाल खींचा गया। 

दीपिका सिंह बताती है कि एक महिला स्टाफ ने उसकी जींस (पतलून) भी खीचने की कोशिश की। घबराई प्रियंका ने एक कमरे में बंद होने की कोशिश की तो उसे खींचकर बाहर निकाला गया। उसे पुलिस की जीप में बिठा दिया गया। वहां पहुंचे उसके पति अनुज श्रीवास्तव के साथ भी दुव्र्यवहार किया गया। अनुज ने दोपहर करीब दो बजे बताया कि प्रियंका कहां है, उन्हें पता नहीं। पुलिस उन्हें कुछ बता नहीं रही है। 

इस बीच बाकी स्टाफ बच्चों की तरफ मुड़े। बच्चों ने रोते हुए अपने आपको छुड़ाया तो उनसे भी मारपीट की गई। घटनास्थल पर चूडिय़ां, स्कार्फ आदि फर्श पर बिखरे मिले। खून का एक हल्का सा धब्बा भी मिला। दीपिका सिंह के मुताबिक बच्चों को खींच-खींचकर निकाला गया। 

कुछ बच्चियां आश्रम से निकलकर भागने लगीं तो उन्हें सौ मीटर तक दौड़ाकर पुलिस ने पकड़ लिया। इस सभी कार्रवाई की जब वीडियो, फोटो खींचे जाने लगा तो पुलिस ने सबका मोबाइल फोन जब्त कर लिया। बाद में निकलते समय वापस किया गया। इनमें अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला का मोबाइल फोन भी शामिल है। 
अपना घर आश्रम के ठीक सामने रहने वाले विकास और उसके परिवार वालों ने बताया कि जब वह मोबाइल पर घटना की फोटो खींचने और वीडियो बनाने लगा तो उसे पुलिस वाले ने दौड़ाया। वह घबराकर घर के भीतर घुस गया। पुलिस ने बाहर से ही आवाज देकर कहा कि मोबाइल फोन लाकर दो। विकास ने फोन नहीं दिया पर वीडियो भी नहीं बना पाया। वह घर के भीतर दुबका रहा। 

भागती हुई एक बच्ची के साथ पुलिस के बर्ताव को देखकर एक महिला ने उन्हें रोका तो उसे भी चुपचाप चले जाने के लिये कहा गया। 

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता जब अपना घर की ओर जाने लगा तो एक जीप पर कुछ बच्चियां रोती हुई मिली। उन्हें एक पुलिस अधिकारी समझा रही थी कि नई जगह पर चलो, तुम सब वहां अच्छे से रहोगे। एक दूसरी जीप वाले को बताया गया कि सबको सरकंडा स्थित निवेदिता हॉस्टल लेकर जाना है। 

पुलिस और विभाग के अधिकारियों के दल के जाने के बाद आसपास के घरों से निकली महिलाओं, बच्चों में दहशत का माहौल व रोष है। उन्होंने बताया कि बच्चियों के साथ इतना क्रूर व्यवहार किया गया जिसे देखकर वे दहल उठीं। एक और महिला ने बताया कि उसने बाहर निकले एक पुलिस वाले से कहा कि जब बच्चे नहीं जाना चाह रहे हैं तो जबरन ऐसा क्यों कर रहे हैं, पुलिस ने कहा कि सरकारी काम में बाधा मत डालो, अंदर चले जाओ। 

ज्ञात हो कि ‘अपना घर’ प्रदेश का एकमात्र एड्स पीडि़तों की देखभाल के लिये खोला गया आश्रम है, जिसे प्रवीण खट्टर, उनकी पत्नी और उनकी बेटी चलाती है। यह समाजसेवियों के अनुदान से चलता है। खट्टर ने महिला बाल विकास विभाग में अनुदान के लिये आवेदन लगाया था। इसके बाद अनुदान तो स्वीकृत हो गया पर खट्टर के आरोपों के मुताबिक उससे 30 प्रतिशत रिश्वत मांगी गई। रिश्वत देने से मना करने की वजह से ही यह सब कार्रवाई हुई है, क्योंकि आश्रम चलता रहता तो उन्हें अनुदान नहीं देने का कारण बताना पड़ता। इस मामले में वे लड़ाई लगेंगे।
 
वहां से निकलते समय महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने सारे रजिस्टर, दस्तावेज, आय व्यय का ब्यौरा दफ्तर में लाकर देने के लिये कहा है। खट्टर को आशंका है कि अपना पक्ष मजबूत करने के लिये उनके व यहां के स्टाफ के खिलाफ झूठे आरोप बच्चियों से लगवाये जा सकते हैं। 


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