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बंदी फरार कराने के मामले में बर्खास्त आरक्षकों को नहीं मिली राहत
17-Jun-2026 1:57 PM
बंदी फरार कराने के मामले में बर्खास्त आरक्षकों को नहीं मिली राहत

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 17 जून। न्यायिक अभिरक्षा में बंद एक आरोपी को अदालत ले जाते समय लापरवाही बरतने और उसके फरार होने के मामले में बर्खास्त किए गए दो आरक्षकों को शीर्ष अदालत से भी कोई राहत नहीं मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से निराश होने के बाद दोनों पूर्व आरक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए याचिका में संशोधन के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।

मामला रायपुर निवासी सुरेश यादव और जशपुर निवासी बुधना राम भगत का है। दोनों वर्ष 2006 में आरक्षक के पद पर कार्यरत थे। 30 जनवरी 2006 को उन्हें राहुल उर्फ अशोक शिंदे नामक आरोपी को राजनांदगांव न्यायालय में पेश करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

विभागीय जांच के अनुसार, आरोपी को कोर्ट ले जाते समय दोनों आरक्षकों ने पावर हाउस क्षेत्र में उसे पर्याप्त सुरक्षा के बिना छोड़ दिया। इसी दौरान आरोपी ने एक व्यवसायी से कथित रूप से जबरन वसूली की। बाद में उसे एक निजी वाहन से राजनांदगांव ले जाया जा रहा था, जहां से वह पुलिस अभिरक्षा से भाग निकला।

घटना को गंभीर कर्तव्यहीनता मानते हुए विभागीय जांच शुरू की गई। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद 23 दिसंबर 2006 को दोनों आरक्षकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

बर्खास्तगी के खिलाफ दोनों ने कानूनी लड़ाई लड़ी, लेकिन हाईकोर्ट ने विभागीय जांच और कार्रवाई को वैधानिक तथा उचित माना। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जांच नियमानुसार की गई है और उसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद दोनों पूर्व आरक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने याचिका में आवश्यक संशोधन करने के लिए एक सप्ताह का समय प्रदान किया। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

 


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