ताजा खबर

रामलीला के विवाद में युवक पर जानलेवा हमले का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
17-Jun-2026 1:55 PM
रामलीला के विवाद में युवक पर जानलेवा हमले का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

हाईकोर्ट द्वारा सजा कम किए जाने के खिलाफ मुख्य आरोपी की अपील
'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 17 जून। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बोरतरा गांव में रामलीला कार्यक्रम के दौरान हुए विवाद के बाद युवक पर हुए जानलेवा हमले का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गया है। इस मामले के मुख्य आरोपी रूपेश कुमार साहू ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। राज्य सरकार ने भी अपना जवाब दाखिल कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट को हाईकोर्ट और निचली अदालत का पूरा रिकॉर्ड प्राप्त हो चुका है और अब मामले की नियमित सुनवाई की जाएगी।

यह घटना 22 फरवरी 2022 की रात की है। बोरतरा गांव के बाजार चौक में रामलीला का आयोजन चल रहा था। इसी दौरान रेखचंद वर्मा और आरोपी छवेंद्र पटेल के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद बढ़ता देख रेखचंद की मां ने बीच-बचाव किया और घर का दरवाजा बंद कर दिया।

अभियोजन के अनुसार, कुछ समय बाद छवेंद्र पटेल अपने साथियों के साथ रेखचंद के घर पहुंचा। आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए घर का दरवाजा तोड़ दिया और रेखचंद को छत से नीचे फेंक दिया। नीचे गिरने के बाद भी उसकी बेरहमी से पिटाई की गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

घटना के बाद रेखचंद का लंबे समय तक इलाज चलता रहा। करीब नौ महीने बाद, 8 नवंबर 2022 को उपचार के दौरान संक्रमण के कारण उसकी मौत हो गई।

मामले की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए इसे हत्या का नहीं बल्कि हत्या के प्रयास का मामला माना। अदालत ने यह पाया कि घायल की मृत्यु घटना के काफी समय बाद संक्रमण के कारण हुई थी और दोनों घटनाओं के बीच प्रत्यक्ष संबंध पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं हो सका।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने चारों दोषियों को दी गई आजीवन कारावास की सजा को निरस्त कर दिया। अदालत ने उनकी सजा घटाते हुए 10 वर्ष के कारावास को सात वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुख्य आरोपी रूपेश कुमार साहू ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य सरकार ने भी अपना पक्ष सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। सभी आवश्यक अभिलेख प्राप्त होने के बाद अब मामले को नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा, जहां हाईकोर्ट के फैसले की वैधानिकता और सजा में किए गए संशोधन पर विचार होगा।


अन्य पोस्ट