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हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त श्रम अधिकारी को दी राहत
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 17 जून। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रशासनिक चूक के कारण समय पर पदोन्नति से वंचित सेवानिवृत्त श्रम अधिकारी देवेंद्र कुमार राजपूत के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि विभाग की लापरवाही का दंड किसी कर्मचारी को नहीं दिया जा सकता। राज्य शासन को निर्देशित किया गया है कि याचिकाकर्ता को उनके कनिष्ठ अधिकारियों की पदोन्नति की तिथि से ही नोशनल पदोन्नति का लाभ दिया जाए।
न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने यह आदेश याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया।
रायपुर श्रम विभाग से 31 जनवरी 2023 को सेवानिवृत्त हुए देवेंद्र कुमार राजपूत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि 14 दिसंबर 2020 को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक हुई थी। उस समय वे पदोन्नति के लिए पूरी तरह पात्र थे, लेकिन उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके नाम पर विचार नहीं किया गया।
इसके विपरीत, उनसे कनिष्ठ अधिकारियों को पदोन्नति प्रदान कर दी गई। बाद में उन्हें 21 दिसंबर 2022 को पदोन्नति मिली, लेकिन तब तक वे लगभग दो वर्षों के लाभ से वंचित हो चुके थे।
याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत तर्कों में कहा गया कि एसीआर का संधारण और उपलब्ध कराना पूरी तरह विभाग की जिम्मेदारी है। यदि विभाग अपने रिकॉर्ड का सही रखरखाव नहीं कर सका तो उसका नुकसान कर्मचारी को नहीं उठाना चाहिए।
राज्य शासन ने अपने जवाब में कहा कि पदोन्नति किसी कर्मचारी का मौलिक अधिकार नहीं है तथा एसीआर उपलब्ध नहीं होने के कारण मामला लंबित रहा।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी को विभागीय त्रुटि के कारण पदोन्नति से वंचित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने कहा कि जब कनिष्ठ अधिकारियों को पदोन्नति मिल गई थी, तब वरिष्ठ और पात्र कर्मचारी को उससे वंचित रखना भेदभावपूर्ण माना जाएगा।
अदालत ने याचिका का निराकरण करते हुए राज्य शासन को निर्देश दिया कि देवेंद्र कुमार राजपूत को 23 दिसंबर 2020 से नोशनल पदोन्नति प्रदान की जाए। यह वही तिथि है, जब उनके कनिष्ठ अधिकारियों को पदोन्नत किया गया था।


