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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 17 जून। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता के अधिवक्ता की लगातार अनुपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए अपीलकर्ता को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ ने यह आदेश सुनवाई के दौरान जारी किया।
मामले की सुनवाई के समय अपीलकर्ता की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ। राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता रामनारायण साहू ने पक्ष रखा। गैर-जमानती वारंट के पालन में अपीलकर्ता उदय कुमार उर्फ उदा को पुलिस अभिरक्षा में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
अभिलेखों के अवलोकन के दौरान अदालत ने पाया कि अपीलकर्ता के अधिवक्ता 10 जून 2025 से लगातार सुनवाई में अनुपस्थित रहे हैं। वर्तमान सुनवाई में भी उनकी ओर से कोई उपस्थिति दर्ज नहीं कराई गई।
इस स्थिति को देखते हुए न्यायालय ने सीधे अपीलकर्ता से चर्चा की। अपीलकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि उसे हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति के माध्यम से अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाए, ताकि उसकी अपील की प्रभावी पैरवी हो सके।
न्यायालय ने हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति के सचिव को निर्देश दिया कि अपीलकर्ता की ओर से पैरवी के लिए एक अधिवक्ता नियुक्त किया जाए। साथ ही नियुक्त अधिवक्ता को औपचारिक नियुक्ति पत्र जारी करने और अपील ज्ञापन सहित सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए, ताकि वह मामले की तैयारी कर प्रभावी ढंग से बहस कर सके।
अदालत ने रजिस्ट्री को अपीलकर्ता की उपस्थिति दर्ज करने तथा उसे संबंधित जेल वापस भेजने के लिए जेल वारंट तैयार करने का निर्देश भी दिया। मामले की अंतिम सुनवाई के लिए अगली तिथि 8 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।


