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भूपेश बघेल की सुनवाई रोकने की याचिका ख़ारिज
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 17 जून। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पाटन विधायक भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका अब अपने मूल तथ्यों और आरोपों के आधार पर सुनी जाएगी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भूपेश बघेल की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त करने की मांग की थी। अदालत ने माना कि याचिका में ऐसे पर्याप्त तथ्य हैं जिनके आधार पर मामले की नियमित सुनवाई की जा सकती है।
इस मामले में अगली सुनवाई 23 जून 2026 को निर्धारित की गई है, जब अदालत याचिका के गुण-दोष (मेरिट) पर विचार शुरू करेगी।
मालूम हो कि दुर्ग सांसद विजय बघेल ने वर्ष 2024 में यह चुनाव याचिका दायर करते हुए भूपेश बघेल की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान से ठीक पहले लागू मौन अवधि (साइलेंस पीरियड) में भूपेश बघेल ने पाटन विधानसभा क्षेत्र में समर्थकों के साथ रैली और रोड शो किया था।
याचिकाकर्ता का दावा है कि इस दौरान चुनावी नारे लगाए गए और मतदाताओं से वोट मांगे गए, जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 का उल्लंघन है। घटना का वीडियो भी रिकॉर्ड किए जाने का उल्लेख याचिका में किया गया है।
सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से 16 बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा गया कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। उनका तर्क था कि आरोपों के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है तथा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का दावा भी प्रमाणित नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप अस्पष्ट हैं और वीडियो व ई-मेल जैसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ आवश्यक धारा 65-बी का प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसके अलावा रोड शो में शामिल लोगों की पहचान तथा उसमें उनकी सहमति को लेकर भी कोई ठोस प्रमाण नहीं है।
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिका में प्रस्तुत तथ्य प्रथम दृष्टया सुनवाई के लिए पर्याप्त हैं।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की वैधता, 65-बी प्रमाणपत्र की आवश्यकता, गवाहों की विश्वसनीयता और अन्य साक्ष्यों की प्रामाणिकता जैसे मुद्दों पर इस प्रारंभिक चरण में फैसला नहीं किया जा सकता। इन बिंदुओं पर निर्णय साक्ष्य दर्ज होने और जिरह की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किया जाएगा।
इससे पहले भी भूपेश बघेल ने हाईकोर्ट द्वारा एक अन्य आवेदन खारिज किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें याचिका की ग्राह्यता (मेंटेनेबिलिटी) के संबंध में हाईकोर्ट में नया आवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दाखिल उसी आवेदन पर अब हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उसे पूरी तरह खारिज कर दिया है।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुकदमे की नियमित सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल को साक्ष्यों की प्रामाणिकता, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की वैधता और अन्य कानूनी आपत्तियां उठाने की पूरी स्वतंत्रता रहेगी।


