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23 साल पुराने मारपीट मामले में सुप्रीम राहत, फिलहाल जेल जाने से बचे आरोपी
15-Jun-2026 12:46 PM
23 साल पुराने मारपीट मामले में सुप्रीम राहत, फिलहाल जेल जाने से बचे आरोपी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 15 जून। बिलासपुर जिले के तखतपुर क्षेत्र में 23 वर्ष पुराने एक आपराधिक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को अंतरिम राहत दी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा सजा बरकरार रखते हुए दो महीने के भीतर आत्मसमर्पण करने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आरोपियों को फिलहाल सरेंडर से छूट मिल गई है।

सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर शामिल थे, ने मामले में छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही अगली सुनवाई तक आरोपियों को आत्मसमर्पण नहीं करने की राहत प्रदान की गई है।

मामले में आरोपी शंभू और अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट द्वारा दिए गए दो माह के सरेंडर समय की अवधि समाप्त होने से पहले सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड दिव्येश प्रताप सिंह के माध्यम से दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता भारत मिश्रा और धीरेंद्र पांडे ने पक्ष रखा।

सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया और मामले को एक अन्य संबंधित याचिका के साथ टैग करने का निर्देश दिया।

अभियोजन के अनुसार 12 अक्टूबर 2003 को बिलासपुर जिले के तखतपुर थाना क्षेत्र के ढनढन गांव में यह घटना हुई थी। शिकायतकर्ता होरीलाल सतनामी के आंगन में स्थित बबूल के पेड़ से आरोपी संतराम ने कथित रूप से अवैध बिजली कनेक्शन ले रखा था।

जब होरीलाल ने पेड़ काटने और बिजली तार हटाने की बात कही तो विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि इसके बाद संतराम, सुखीराम, शंभू, पंचू और मुन्नी बाई लाठी-टंगिया लेकर पहुंचे और होरीलाल तथा उसके भाई कुंवरदास पर हमला कर दिया, जिससे दोनों घायल हो गए।

घटना के बाद दर्ज मामले में निचली अदालत ने आरोपियों को हत्या के प्रयास सहित अन्य धाराओं में दोषी मानते हुए पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी।

हालांकि 27 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने अपील पर फैसला सुनाते हुए हत्या के प्रयास की धारा 307 से आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि घायलों को गंभीर चोट नहीं आई थी और विवाद अचानक उत्पन्न हुआ था।

फिर भी अदालत ने खतरनाक हथियार से चोट पहुंचाने और बलवा करने के अपराध में शंभू, संतराम, सुखीराम और पंचू को नौ-नौ माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं महिला आरोपी मुन्नी बाई की सजा को पहले से काटी गई लगभग तीन माह की अवधि तक सीमित कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की अंतरिम अर्जी स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई तक सरेंडर की अनिवार्यता पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता विनायक शर्मा ने नोटिस स्वीकार किया है। अदालत ने सरकार को अगली सुनवाई से पहले जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।


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