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(नंदी विजयकुमार और सिल्विया सी लिन, डीकिन विश्वविद्यालय; सुसान एम सॉयर, मेलबर्न विश्वविद्यालय द्वारा)
मेलबर्न, 13 जून। ब्रिटेन और अन्य देश 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया तक पहुंच को सीमित करने के मामले में ऑस्ट्रेलिया के उपायों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन अभी भी हम इस बारे में बहुत कुछ नहीं जानते हैं कि प्रौद्योगिकी कम उम्र वालों के मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती है।
उदाहरण के लिए, क्या प्रतिदिन कुछ घंटों तक सोशल मीडिया का उपयोग करने से अधिक नुकसान होता है? क्या किशोर वयस्कों की तुलना में अधिक संवेदनशील होते हैं? क्या लड़कों और लड़कियों के बीच कोई अंतर है?
हमारा नया अध्ययन, जो ‘मेडिकल जर्नल ऑफ ऑस्ट्रेलिया’ में प्रकाशित हुआ है, इन सवालों के कुछ महत्वपूर्ण उत्तर प्रदान करता है। इसमें पाया गया कि कम उम्र वालों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के अधिक उपयोग से स्पष्ट जोखिम होता है।
इसके साथ ही, हमने हाल में ऑस्ट्रेलियाई अभिभावकों के बीच एक सर्वेक्षण भी कराया, जिसमें कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया तक पहुंच को सीमित करने के प्रयासों के बारे में उनकी राय ली गई। इन निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि कानून बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर माता-पिता की सोच और व्यवहार को बदल रहा है।
‘‘उम्र को लेकर बहस’’
जब ऑस्ट्रेलिया ने पिछले दिसंबर में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया की पहुंच को प्रतिबंधित किया था, तब इस बात को लेकर काफी बहस हुई थी कि क्या 16 वर्ष उपयुक्त आयु-सीमा है।
ऐसे कई दीर्घकालिक अध्ययन किए गए थे जिन्होंने किशोरों के सोशल मीडिया उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य के बीच जुड़ाव की जांच की थी। लेकिन बहुत कम अध्ययनों ने यह व्यवस्थित रूप से जांचा था कि क्या किशोरावस्था के दौरान अलग-अलग उम्र में सोशल मीडिया उपयोग के जोखिमों में कोई अंतर होता है।
ब्रिटेन के 2022 के अध्ययन में पाया गया कि समय के साथ किशोरों के सोशल मीडिया उपयोग में वृद्धि का संबंध जीवन संतुष्टि में कमी से था, विशेष रूप से कुछ आयु अवधियों में-लड़कियों के लिए 11 से 13 वर्ष की उम्र और लड़कों के लिए 14 से 15 वर्ष की उम्र में।
विस्तृत जांच करना
हमारे नए अध्ययन का उद्देश्य इन रुझानों की गहराई से जांच करना था।
हमने मेलबर्न के 1,195 विद्यार्थियों के डेटा का इस्तेमाल किया, जिन पर शोधकर्ताओं ने 12 से 18 वर्ष की उम्र तक हर साल निगरानी रखी है।
हमने इस बात की जांच की कि क्या उनका सोशल मीडिया उपयोग बाद में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा था और साथ ही उन विभिन्न व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कारकों को भी सांख्यिकीय रूप से शामिल किया, जिनके बारे में ज्ञात है कि वे सोशल मीडिया उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य-दोनों को प्रभावित करते हैं।
हमने पाया कि जो किशोर प्रतिदिन दो घंटे से अधिक सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते थे, उनमें एक वर्ष बाद मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त होने का जोखिम, प्रतिदिन एक घंटे से कम उपयोग करने वालों की तुलना में अधिक था। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में अवसाद के बढ़े हुए लक्षण शामिल थे।
महत्वपूर्ण रूप से, किशोरावस्था के दौरान सोशल मीडिया उपयोग के जोखिम सभी में समान रूप से अनुभव नहीं किए गए थे। सबसे अधिक प्रभाव 12 से 13 वर्ष की आयु के बच्चों में देखे गये।
जब बड़ी संख्या में बच्चे प्रतिदिन दो घंटे से अधिक सोशल मीडिया पर समय बिता रहे हों, तो छोटे-छोटे प्रभाव भी जनसंख्या स्तर पर महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
केवल उम्र-आधारित प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं-
हमारा अध्ययन यह निर्धारित नहीं कर सकता कि किस सटीक उम्र पर सोशल मीडिया ‘सुरक्षित’ हो जाता है। हालांकि, अन्य शोधों के साथ मिलकर हमारा अध्ययन यह संकेत देता है कि किशोर सोशल मीडिया के संभावित दुष्प्रभावों के प्रति विशेष रूप से अधिक संवेदनशील होते हैं, और सबसे प्रतिकूल प्रभाव प्रारंभिक किशोरावस्था के दौरान देखने को मिलते हैं।
इसके परिणामस्वरूप, हमें उम्मीद है कि ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया कानून कम उम्र वालों के मानसिक स्वास्थ्य पर सबसे अधिक प्रभाव डालेगा। लेकिन इसकी पुष्टि के लिए आगे और शोध की आवश्यकता है।
स्कूलों में डिजिटल साक्षरता और सुरक्षा से संबंधित शिक्षा को बेहतर बनाना तथा माता-पिता को समर्थन देना भी शामिल है, ताकि वे बच्चों को अधिक बेहतर ऑनलाइन आदतें विकसित करने में मदद कर सकें।
हमने हाल में ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया तक पहुंच को सीमित करने वाले कानून के बारे में 0 से 17 वर्ष की उम्र के 2,000 से अधिक बच्चों के माता-पिता के बीच एक सर्वेक्षण भी किया।
सर्वेक्षण में पाया गया कि 59 प्रतिशत माता-पिता का मानना था कि यह कानून उन्हें सोशल मीडिया उपयोग को लेकर नियम निर्धारित करने में मदद करता है। इसके अलावा, 39 प्रतिशत माता-पिता ने बताया कि इस कानून ने इस बारे में उनकी सोच बदल दी है कि बच्चों को पहली बार सोशल मीडिया अकाउंट कब बनाना चाहिए।
हालांकि ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया कानून के प्रभावों पर साक्ष्य अभी सामने आ रहे हैं, फिर भी इसने किशोरों के सोशल मीडिया उपयोग पर वैश्विक चर्चाओं को पहले ही प्रभावित किया है।
उम्र के आधार पर सोशल मीडिया पाबंदियों को लेकर बहस अब कई देशों में हो रही है। और यह चर्चा अब न केवल इस सवाल से आगे बढ़कर तेजी से इस ओर केंद्रित हो रही है कि सोशल मीडिया बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है या नहीं, बल्कि इस पर कि बच्चे किस उम्र में सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं और समाज के रूप में हमें इस पर कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए। (द कन्वरसेशन)
(द कन्वरसेशन) देवेंद्र नेत्रपाल


