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यूएपीए से जुड़े मामले में चार साल से जेल में बंद कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता को मिली ज़मानत
11-Jun-2026 9:19 AM
यूएपीए से जुड़े मामले में चार साल से जेल में बंद कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता को मिली ज़मानत

दिल्ली हाई कोर्ट ने कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता ख़ुर्रम परवेज़ को यूएपीए से जुड़े एक मामले में ज़मानत दे दी है. ख़ुर्रम इस मामले में चार साल से ज़्यादा समय से जेल में बंद थे.

इसकी पुष्टि समाचार एजेंसी पीटीआई ने परवेज़ की वकील स्वाति खन्ना के हवाले से की है. वकील स्वाति खन्ना ने बताया है कि "कोर्ट का ऑर्डर अपलोड न होने से हमें बेल की शर्तों का पता नहीं लगा है लेकिन उन्हें रेग्युलर बेल मिल गई है. हालांकि वे इससे बाहर नहीं आ सकेंगे, उनके ख़िलाफ़ एक और मामला चल रहा है.”

दरअसल, यह मामला एनआईए की एक जांच से जुड़ा है, जिसमें ख़ुर्रम परवेज़ को चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का रिक्रूटर बताने का दावा किया गया था.

यूएपीए क़ानून में ज़मानत से जुड़ी सख़्त शर्तों के बावजूद बेल मिलने के चलते दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले को अहम माना जा रहा है.

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की बेंच ने एनआईए कोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती देने वाली अपील को स्वीकारा है, जिसने ख़ुर्रम परवेज़ को ज़मानत देने से इनकार किया गया था.

ख़ुर्रम की गिरफ्तारी साल 2021 में श्रीनगर से की गई थी. तब ख़ुर्रम परवेज़ जम्मू-कश्मीर कोअलिशन ऑफ़ सिविल सोसाइटी(जेकेसीसीएस) नाम की एक ग़ैर-सरकारी संस्था के प्रोग्राम कोर्डिनेटर थे.

इस संस्था ने पिछले तीन दशकों से कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं पर आधारित कई रिपोर्ट जारी की हैं. (bbc.com/hindi)


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