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पूर्व सरपंच समेत 10 पर एफआईआर, पुलिस ने बताया जमीन विवाद
क्रिश्चियन फोरम ने प्रार्थना सभा के दौरान हमले का लगाया आरोप
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सुकमा, 2 जून। सुकमा जिले के साडरापाल गांव में रविवार की सुबह हुई हिंसक झड़प में 13 लोग घायल हो गए। पुलिस इसे जमीन और आपसी विवाद से जुड़ा सामान्य मारपीट का मामला बता रही है, जबकि छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम का आरोप है कि रविवार की प्रार्थना सभा के दौरान ईसाई समुदाय के लोगों पर हमला किया गया।
सुकमा पुलिस ने रविवार रात करीब 7.54 बजे आधिकारिक व्हाट्सएप्प ग्रुप में जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया, घटना 31 मई की सुबह हुई। मामले में 10 ग्रामीणों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
आरोपियों में पूर्व सरपंच हुड़माराम माड़वी समेत गंगाराम कवासी, बुधरा कवासी, महादेव कवासी, हनीश करटामी, आयता कवासी, लच्छु कवासी, हांदा वेड्डी, गुड़ीराम वेड्डी और सत्रा आयता के नाम शामिल हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायत में जमीन विवाद को लेकर हमला करने का आरोप
थाना तोंगपाल में दर्ज शिकायत के अनुसार साडरापाल निवासी हिड़मा कवासी ने आरोप लगाया है कि गांव के पूर्व सरपंच हुड़माराम माड़वी अपने समर्थकों के साथ पहुंचे और जमीन विवाद को लेकर विवाद शुरू किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपियों ने पहले गाली-गलौज की, फिर जान से मारने की धमकी देते हुए लाठी-डंडों और हाथ-मुक्कों से हमला कर दिया।
शिकायत में बताया गया है कि मारपीट में उसके सिर, हाथ और पैर में चोटें आईं, जबकि उसकी पत्नी को पीठ और कमर में गंभीर दर्द और सूजन हुई। अन्य ग्रामीणों के घायल होने का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जमीन संबंधी शिकायतों को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से तनाव बना हुआ था।

क्रिश्चियन फोरम का आरोप
दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम ने इस घटना को धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। फोरम द्वारा जारी प्रेस बयान में कहा गया है कि रविवार सुबह ईसाई समुदाय के लोग एक मिट्टी के घर में प्रार्थना कर रहे थे। इसी दौरान लाठियों से लैस लोगों ने वहां पहुंचकर प्रार्थना सभा में शामिल लोगों पर हमला कर दिया। फोरम का दावा है कि हमले में कई लोग घायल हुए और कुछ की हालत गंभीर हो गई।
हालांकि, इस दावे की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्रिश्चियन फोरम ने कहा, जब थाना, कोर्ट और कचहरी मौजूद हैं तो किसी को भी कानून हाथ में लेकर ईसाइयों के ऊपर डंडा उठाने का अधिकार नहीं है। यदि कोई शिकायत थी तो उसकी जांच पुलिस और प्रशासन को करनी चाहिए थी। इस तरह की घटनाएं समाज में वैमनस्यता का बीज बोती हैं और ईसाई समाज में गहरा दु:ख और असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं।


