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सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर दो दिन की रोक
01-Jun-2026 12:07 PM
सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर दो दिन की रोक

सात दिन पहले नोटिस नहीं देने की दलील दी गई थी हाईकोर्ट में  

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 1 जून। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की ग्राम पंचायत तुरमा की महिला सरपंच के खिलाफ प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव की बैठक पर हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने दो दिन की रोक लगा दी है। अदालत के आदेश के बाद अब यह बैठक नोटिस जारी होने की तिथि से सात दिन पूरे होने के बाद ही आयोजित की जा सकेगी।

मामला ग्राम पंचायत तुरमा की निर्वाचित सरपंच फूलेश्वरी बंजारे का है। पंचायत के कुछ पंचों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव पर विचार के लिए बैठक 29 मई 2026 को निर्धारित की गई थी। सरपंच ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिका में कहा गया कि उन्हें कानून के तहत निर्धारित न्यूनतम सात दिन का नोटिस नहीं दिया गया। उनका तर्क था कि नोटिस 20 मई 2026 को जारी किया गया, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी और प्रति 24 मई को प्राप्त हुई। ऐसे में 29 मई को बैठक आयोजित करना पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है।

याचिकाकर्ता ने अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित पूरी कार्रवाई को निरस्त करने की मांग की थी। उनका कहना था कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 21 के तहत निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया है।

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता तथा केविएटर पक्ष के अधिवक्ता ने याचिका का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने रिकॉर्ड का अवलोकन किया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नोटिस 20 मई को जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को तामील कराने के लिए भेजा गया था, जबकि याचिकाकर्ता को यह 24 मई को मिला। ऐसे में प्रथम दृष्टया यह नहीं माना जा सकता कि सरपंच को बैठक से पहले नियमों के अनुरूप सात दिन का समय मिला था।

इसी आधार पर अदालत ने 29 मई को प्रस्तावित बैठक पर दो दिन की रोक लगाते हुए स्पष्ट किया कि अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया सात दिन की वैधानिक अवधि पूरी होने के बाद ही आगे बढ़ाई जाएगी। इसके अनुसार बैठक अब 31 मई 2026 या उसके बाद आयोजित की जा सकेगी।

हाईकोर्ट ने सरपंच फूलेश्वरी बंजारे को निर्देश दिया है कि वे अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही में सहयोग करें और अपने पास उपलब्ध सभी अभिलेख तैयार रखें। अदालत ने कहा कि संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) इन दस्तावेजों की जांच कानून के अनुसार करेंगे।

इन टिप्पणियों और निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया।


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