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विकास नहीं, अब अस्तित्व बचाने की लड़ाई का समय, व्यावसायिक परियोजनाओं पर रोक लगाएं- सिंघवी
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायपुर, 26 मई । छत्तीसगढ़ इस समय रिकॉर्डतोड़ गर्मी की चपेट में है। रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और बिलासपुर जैसे शहरों में लगातार बढ़ता तापमान लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी बीच पर्यावरण और जलवायु संकट को लेकर नितिन सिंघवी ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सभी खाली सरकारी जमीनों पर अर्बन फॉरेस्ट विकसित करने की मांग उठाई है।
उन्होंने सवाल किया है कि क्या हम अपने भविष्य और अस्तित्व को लेकर जरा भी गंभीर हैं? सिंघवी ने कहा कि मजदूर, रिक्शा चालक, डिलीवरी कर्मी, किसान, बुजुर्ग और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोग इस भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर झेल रहे हैं। लगातार बढ़ती गर्मी, उमस और हीटवेव अब सामान्य स्थिति बनती जा रही है। वैज्ञानिक पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि आने वाले वर्षों में जलवायु संकट और खतरनाक रूप ले सकता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 दुनिया का सबसे गर्म वर्ष हो सकता है।
पत्र में रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव की खाली सरकारी जमीनों पर प्रस्तावित आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं का विरोध किया गया है। इनमें रायपुर के शांति नगर और बीटीआई कॉलोनी की जमीनें भी शामिल हैं। सिंघवी ने मांग की है कि इन जमीनों पर कंक्रीट निर्माण के बजाय छोटे-छोटे अर्बन फॉरेस्ट तैयार किए जाएं, ताकि शहरों में बढ़ते तापमान को नियंत्रित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि शहरों में तेजी से बढ़ती कंक्रीट की इमारतें, लोहे के ढांचे और डामर की सड़कें दिनभर गर्मी सोखती हैं और रात में उसे वापस छोड़ती हैं। इसी कारण अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट बढ़ रहा है, जिससे शहरों का तापमान लगातार ऊपर जा रहा है।
पत्र में तालाबों के आसपास बनाए गए अनावश्यक रिटेनिंग वॉल और कंक्रीट संरचनाओं को हटाने की भी मांग की गई है, ताकि भूजल रिचार्ज बेहतर हो सके। साथ ही कॉलोनियों में पक्के पावर ब्लॉक और कंक्रीट किनारों की जगह मिट्टी और हरित सतह विकसित करने का सुझाव दिया गया है।
सिंघवी ने यूरोपीय देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां शहरों में अतिरिक्त कंक्रीट और डामर हटाने के अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि तापमान कम हो, बारिश का पानी जमीन में समा सके और शहर जलवायु संकट के प्रति अधिक सुरक्षित बनें।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में गर्मियों के दौरान बच्चों का बाहर निकलकर खेलना तक मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब केवल विकास की बात करने का समय नहीं, बल्कि लोगों के अस्तित्व और भविष्य को बचाने की तैयारी करने का समय है।


