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जीजा पर नाबालिग से रेप का आरोप, फरार आरोपी की पत्नी ने मांगी थी कस्टडी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 18 मई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक हैबियस कॉर्पस याचिका की सुनवाई के दौरान ऐसा खुलासा हुआ, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच के सामने पेश किए गए दो मासूम बच्चों ने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी की अवैध कैद में नहीं हैं, बल्कि चाइल्ड ऑब्जर्वेशन होम में पूरी तरह सुरक्षित हैं।
मामला सरगुजा क्षेत्र की एक महिला द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उसकी नाबालिग सौतेली बहन और भाई को अवैध रूप से रोका गया है। महिला ने बच्चों की सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें अपनी अभिरक्षा में सौंपने की मांग की थी।
प्रारंभिक सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि बच्चों को बंदी बनाकर नहीं रखा गया है, बल्कि उनकी सुरक्षा और कानूनी संरक्षण के लिए चाइल्ड ऑब्जर्वेशन होम में रखा गया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने बच्चों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश करने का आदेश दिया।
पुलिस सुरक्षा के बीच जब दोनों बच्चों को अदालत में प्रस्तुत किया गया, तब उन्होंने न्यायालय के सामने पूरी सच्चाई बताई। बच्चों ने कहा कि याचिकाकर्ता महिला के पति ने नाबालिग लड़की के साथ तीन बार दुष्कर्म किया था। इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और आरोपी फिलहाल फरार है।
बच्चों के बयान और उपलब्ध कानूनी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने फिलहाल दोनों बच्चों को ऑब्जर्वेशन होम में ही रखने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। साथ ही प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर पूरे मामले की जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कोर्ट ने प्रतिवादी सामाजिक कार्यकर्ता को जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 29 जून को निर्धारित की गई है।


