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बिलासपुर ट्रिब्यूनल का अहम फैसला
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 18 मई। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के 10वें अतिरिक्त सदस्य आदित्य जोशी की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि गृहिणी को परिवार का गैर कमाऊ सदस्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि घर और परिवार के लिए एक महिला द्वारा किए जाने वाले कार्यों का आर्थिक महत्व होता है और उसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। इस आधार पर सड़क हादसे में जान गंवाने वाली 22 वर्षीय सुमन पैकरा के परिजनों को 24 लाख 25 हजार 194 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।
यह हादसा 28 फरवरी 2023 की रात मुंगेली जिले के लालपुर थाना क्षेत्र के गुरुवाइन गांव के पास हुआ था। सुमन पैकरा अपने पति मनोज कुमार कंवर और बेटे के साथ मोटरसाइकिल से जा रही थीं। इसी दौरान टाटा माजदा वाहन के चालक राम आसरे यादव ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे सुमन की मौत हो गई।
मुआवजा तय करते समय ट्रिब्यूनल ने श्रम आयुक्त की अधिसूचना का हवाला देते हुए सुमन को कुशल श्रमिक की श्रेणी में माना। अदालत ने उनकी दैनिक मजदूरी 428 रुपये तय करते हुए मासिक आय 11,128 रुपये और वार्षिक आय 1,33,536 रुपये आंकी। सुप्रीम कोर्ट के प्रणय सेठी फैसले के अनुसार भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए आय में 40 प्रतिशत वृद्धि भी जोड़ी गई।
इसके अलावा अंतिम संस्कार, संपत्ति क्षति और पारिवारिक स्नेह के नुकसान के मद में भी अलग-अलग राशि जोड़ी गई। ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी और वाहन मालिक को संयुक्त रूप से एक माह के भीतर मुआवजा राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दावा प्रस्तुत करने की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश भी दिया गया है।


