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अडानी पर अमेरिकी आपराधिक मामला वापस लेने की तैयारी?
16-May-2026 1:00 PM
अडानी पर अमेरिकी आपराधिक मामला वापस लेने की तैयारी?

10 अरब डॉलर निवेश, 15 हजार नौकरियों की पेशकश की चर्चा

नई दिल्ली/वॉशिंगटन, 16 मई। अमेरिकी न्याय विभाग भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे आपराधिक धोखाधड़ी और रिश्वत मामले को वापस लेने की तैयारी कर रहा है। यह दावा न्यूयॉर्क टाइम्स, ब्लूमबर्ग और रॉयटर्स समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में किया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार अडानी समूह ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 10 अरब डॉलर निवेश और लगभग 15 हजार नौकरियाँ पैदा करने की योजना पेश की है। कहा जा रहा है कि यह प्रस्ताव अडानी की कानूनी रणनीति का हिस्सा था।

गौरतलब है कि नवंबर 2024 में अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अडानी और उनके सहयोगियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारत में एक विशाल सौर ऊर्जा परियोजना की मंजूरी के लिए लगभग 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत योजना चलाई और अमेरिकी निवेशकों तथा बैंकों से यह जानकारी छिपाकर अरबों डॉलर जुटाए। अडानी समूह ने इन आरोपों को लगातार “बेबुनियाद” बताया है।

रिपोर्टों के मुताबिक अडानी ने हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निजी वकील माने जाने वाले एक वकील को अपनी कानूनी टीम में शामिल किया। बताया गया है कि उन्होंने अमेरिकी न्याय विभाग के अधिकारियों के सामने लगभग 100 स्लाइड की प्रस्तुति देकर तर्क दिया कि मामले में अमेरिकी अधिकार-क्षेत्र कमजोर है और अभियोजन के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

 

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अडानी पक्ष ने यह भी संकेत दिया कि लंबित आपराधिक मामला समाप्त होने पर समूह अमेरिका में बड़े निवेश को आगे बढ़ा सकेगा। हालाँकि कुछ अभियोजकों ने साफ कहा कि निवेश प्रस्ताव का मामले के निपटारे से कोई संबंध नहीं होना चाहिए।

इसी बीच अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग यानी SEC के साथ चल रहा समानांतर सिविल मामला भी समझौते की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। रिपोर्टों के अनुसार गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी लगभग 1.5 से 1.8 करोड़ डॉलर तक का जुर्माना भरने पर सहमत हो सकते हैं, हालांकि वे किसी भी आरोप को स्वीकार नहीं करेंगे।

कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अडानी समूह अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की एक अलग जांच में अतिरिक्त वित्तीय दंड का सामना कर सकता है।

इस घटनाक्रम को ट्रम्प प्रशासन के तहत अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा बाइडेन काल में शुरू हुए कुछ हाई-प्रोफाइल मामलों से पीछे हटने की बड़ी मिसाल के रूप में भी देखा जा रहा है।

हालाँकि भारत में अडानी समूह से जुड़े कुछ अन्य आरोपों और नियामकीय मामलों पर जांच अभी भी जारी है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है।


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