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6 करोड़ की फिरौती के लिए बड़ी मां ने ही रची थी साजिश
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 16 मई। बिलासपुर के बहुचर्चित और सनसनीखेज विराट सराफ अपहरण कांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोषियों को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक, तकनीकी और मौखिक साक्ष्य पूरी तरह साबित करते हैं कि यह फिरौती वसूलने के उद्देश्य से रची गई सुनियोजित आपराधिक साजिश थी।
मामला 20 अप्रैल 2019 का है। बर्तन व्यवसायी विवेक सराफ का मासूम बेटा विराट सराफ कश्यप कॉलोनी में अपने घर के पास खेल रहा था, तभी उसका अपहरण कर लिया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरे घटनाक्रम की मुख्य साजिशकर्ता बच्चे की अपनी बड़ी मां नीता सराफ थी। पैसों के लालच में उसने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर इस वारदात की योजना बनाई थी।
जांच में पता चला कि आरोपी अनिल सिंह, राजकिशोर सिंह, हरेकृष्ण और सतीश शर्मा ने मिलकर वैगन-आर कार में बच्चे का फिल्मी अंदाज में अपहरण किया। इसके बाद पुराने बस स्टैंड और शिव टॉकीज मार्ग से होते हुए वे रेलवे स्टेशन पहुंचे, जहां पहले से दूसरी गाड़ी तैयार खड़ी थी। वहां से बच्चे को डस्टर वाहन में बैठाकर जरहाभाठा के पन्ना नगर स्थित राजकिशोर सिंह के घर ले जाया गया।
आरोपियों ने बच्चे के हाथ-पैर बांधकर उसे बंधक बनाया और उसके पिता विवेक सराफ को 6 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने वाला ऑडियो संदेश भेजा। इस संदेश में बच्चे की आवाज का इस्तेमाल किया गया था।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में सबूतों की पूरी श्रृंखला बिना किसी टूटन के आरोपियों की ओर इशारा करती है।
कोर्ट ने माना कि सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल टावर लोकेशन, आईएमईआई लिंक, फिंगरप्रिंट, आरोपियों की गतिविधियां और घटना के बाद का व्यवहार सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और अपराध को साबित करते हैं।
फैसले में यह भी कहा गया कि मल्टी-स्पीच सॉफ्टवेयर और फॉरेंसिक जांच से यह साबित हो गया कि फिरौती के लिए की गई कॉल आरोपी राजकिशोर सिंह की आवाज में ही की गई थी।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सभी सजाओं को बरकरार रखा। आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 364-ए और 120-बी के तहत उम्रकैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त कठोर कारावास भी भुगतना होगा।
इसके अलावा अपहरण, साजिश और अवैध बंधक बनाने से जुड़ी विभिन्न धाराओं में 7 वर्ष से 14 वर्ष तक की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
पुलिस की तत्परता और तकनीकी जांच के आधार पर मासूम विराट को सुरक्षित बरामद कर लिया गया था। इस मामले में नीता सराफ सहित पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था।


