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भारत की 211 दुर्लभ कलाकृतियों की वापसी की मांग, 6 जून अंतिम अवसर
06-May-2026 3:22 PM
 भारत की 211 दुर्लभ कलाकृतियों की वापसी  की मांग, 6 जून अंतिम अवसर

छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय को लिखा  पत्र

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

रायपुर, 6 मई ​ । छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय को एक कड़ा पत्र लिखकर भारत की प्राचीन संपदाओं की वापसी के लिए 6 जून 2026 की 'अंतिम तिथि' तय कर दी है। 

सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने किंग चार्ल्स को भेजे गए इस पत्र में साफ कहा है कि ब्रिटिश संग्रहालय में प्रदर्शित भारतीय कलाकृतियां केवल वस्तुएं नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता का हिस्सा हैं। पत्र में विशेष रूप से हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की 'वाघ नख' और उनकी प्राणप्रिय 'जगदंबा तलवार' तथा उनके तैल चित्र इत्यादि की तत्काल वापसी की मांग की गई है।

डॉ. सोलंकी ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब भारत अपनी उन निधियों को वापस ले, जो बलपूर्वक या छल से औपनिवेशिक शासन के दौरान ले जाई गई थीं।

हर्जाने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

सोसायटी ने स्पष्ट किया है कि  यदि 6 जून 2026 तक ये धरोहरें भारत को सम्मानपूर्वक नहीं लौटाई गईं, तो सिविल सोसायटी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) का दरवाजा खटखटाएगी।

केवल धरोहरों की वापसी ही नहीं, बल्कि पिछले कई दशकों से इन वस्तुओं के प्रदर्शन से ब्रिटेन द्वारा अर्जित किए गए राजस्व और ब्याज सहित 5 लाख ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक हर्जाने का भी दावा किया जाएगा।

 

सूची में शामिल हैं 211 बेशकीमती धरोहरें

केवल छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी वस्तुएं ही नहीं, बल्कि भारत की 211 दुर्लभ कलाकृतियों की वापसी का एजेंडा तैयार किया गया है। इनमें प्रमुख हैं:
    अमरावती स्तूप के अवशेष: लगभग 2,000 साल पुराने अमरावती मार्बल्स।
    होयसल कला : 12वीं-13वीं शताब्दी की नक्काशीदार मूर्तियां।
    शिव नटराज : चोल काल की विश्वप्रसिद्ध कांस्य प्रतिमाएं।
    सम्राट अशोक के शिलालेख : ब्राह्मी लिपि में अंकित भारतीय इतिहास के प्राचीनतम साक्ष्य।
    मुगल-राजपूत लघु चित्र : दरबारी जीवन और शौर्य गाथाओं को दर्शाते दुर्लभ पेंटिंग्स।
    धार्मिक मूर्तियां: भगवान गणेश, दुर्गा, सूर्य देव और विष्णु की प्राचीन प्रतिमाएं, साथ ही जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां।


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