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जम्मू-कश्मीर में पुल ढहने से मजदूर की मौत, एयर एंबुलेंस से गांव पहुंचा शव
04-May-2026 12:27 PM
जम्मू-कश्मीर में पुल ढहने से मजदूर की मौत, एयर एंबुलेंस से गांव पहुंचा शव

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

जांजगीर-चांपा, 4 मई। रोजगार की तलाश में जम्मू-कश्मीर गए जिले के एक युवक की दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। निर्माणाधीन पुल के अचानक ढह जाने से हुए इस हादसे में युवक सहित तीन मजदूरों की जान चली गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। दो दिन बाद युवक का शव उसके गृहग्राम किरारी पहुंचाया गया, जहां परिजनों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया।

मिली जानकारी के अनुसार, अकलतरा विकासखंड के ग्राम किरारी निवासी 24 वर्षीय हरीशचंद्र केवट, पिता गोवर्धन प्रसाद केवट, अपने परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अन्य ग्रामीणों के साथ मजदूरी करने जम्मू-कश्मीर गया था। 1 मई की शाम डुबाना थाना क्षेत्र में बंधवा तालाब पर बन रहे पुल के अचानक गिर जाने से यह बड़ा हादसा हुआ। घटना में मौके पर ही तीन मजदूरों की मौत हो गई, जिनमें हरीशचंद्र भी शामिल था, जबकि 6-7 मजदूर घायल हो गए।

हादसे के बाद मृतक के परिजनों के सामने शव को गांव तक लाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। इस बीच परिजनों ने स्थानीय विधायक राघवेंद्र सिंह से संपर्क किया। विधायक ने तुरंत पहल करते हुए जिला प्रशासन और राज्य शासन के अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया।

प्रशासन की मदद से शव को एयर एंबुलेंस के जरिए जम्मू-कश्मीर से दिल्ली और फिर रायपुर लाया गया। इसके बाद सड़क मार्ग से एंबुलेंस द्वारा शव को किरारी गांव पहुंचाया गया। गांव पहुंचने पर परिजनों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया।

इस दुखद घटना से गांव में शोक का माहौल है। मृतक के पिता गोवर्धन प्रसाद केवट, माता गणेशी बाई सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने इस कठिन समय में सहयोग के लिए विधायक का आभार जताया।

 104 साल के बुजुर्ग की जमीन गिरवी रखकर लिया लोन, चार दोषियों को सजा

बिलासपुर, 4 मई। करीब आठ साल पुराने जमीन फर्जीवाड़ा मामले में अदालत ने चार आरोपियों को दोषी ठहराया है। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अनूप तिग्गा की अदालत ने 104 वर्षीय बुजुर्ग मोहन बंजारे की 20 एकड़ जमीन पर फर्जी दस्तावेज बनाकर लोन लेने के मामले में चारों दोषियों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने सुमन कार्तिक राठ उर्फ शनि, भूपेंद्र कुमार साहू, बंटी उर्फ शैलेंद्र सिंह बघेल और टिकेंद्र जायसवाल को आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत दोषी पाया।

प्रकरण के अनुसार, वर्ष 2018 में आरोपियों ने मुंगेली जिले के गोइंद्रा गांव निवासी 104 वर्षीय मोहन बंजारे की जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार किए। बिना उनकी जानकारी और सहमति के, इन दस्तावेजों के आधार पर बिलासपुर के सीपत रोड स्थित एक्सिस बैंक शाखा में जमीन गिरवी रखकर लोन ले लिया गया।

इस ठगी का खुलासा तब हुआ, जब बुजुर्ग के बेटे बलदाऊ बंजारे और पोते शिवचरण ने मोबाइल पर जमीन के रिकॉर्ड की जांच की। बैंक पहुंचने पर उन्होंने पाया कि लोन आवेदन में लगी फोटो मोहन बंजारे की नहीं थी। साथ ही आधार कार्ड और वोटर आईडी भी फर्जी पाए गए। असली मोहन बंजारे का जन्म वर्ष 1934 में हुआ था, जबकि दस्तावेजों में 1969 और 1971 दर्शाया गया था।

अदालत ने अपने फैसले में यह भी निर्देश दिया कि दोषियों से वसूले गए जुर्माने की राशि में से कुल 10 हजार रुपये पीड़ित मोहन बंजारे को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे।

मामले में एक अन्य आरोपी प्रांजल पांडे को अदालत ने बरी कर दिया, क्योंकि घटना के समय वह संबंधित बैंक शाखा में पदस्थ नहीं थे। वहीं, मुख्य आरोपियों में शामिल परदेशी लोधी की मृत्यु हो चुकी है, जबकि एक अन्य आरोपी पवित्रा साहू अब भी फरार है और उसे न्यायालय ने भगोड़ा घोषित किया है।

इस फैसले को बुजुर्गों के अधिकारों की सुरक्षा और दस्तावेजी फर्जीवाड़े के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।


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