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छात्र-छात्रा ने की खुदकुशी
महासमुंद, 4 मई। सरायपाली क्षेत्र के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल शिशुपाल पर्वत से एक प्रेमी जोड़े ने कूदकर अपनी जान दे दी। दोनों मृतक सांकरा थाना क्षेत्र के ग्राम बारीकपाली के रहने वाले थे।
बताया जाता है दोनों 2 मई को दोपहर करीब ढाई बजे अपने घर से निकले थे। घर से निकलने के बाद दोनों शिशुपाल पर्वत पहुंचे। पहाड़ की चोटी पर चढक़र दोनों ने अपने-अपने परिजनों को फोन पर बताया कि हम एक दूसरे से प्यार करते हैं, शादी करना चाहते हैं। लेकिन हम एक साथ नहीं रह पा रहे हैं। इसलिए सभी से कहा सुनी माफ..अलविदा। इसके बाद दोनों ने पहाड़ी से छलांग लगा ली।
युवक के मामा खेमा निधि साव ने बताया कि एक राजमिस्त्री को दोनों के प्रेमप्रसंग के बारे में पता चल गया था और वह दोनों को ब्लैकमेल कर रहा था। इससे दोनों डरे हुए थे। परिजनों ने आशंका व्यक्त की है कि दोनों ने उससे परेशान होकर आत्मघाती कदम उठाया होगा।
मृतकों की पहचान दिलेश साहू 18 साल और कोमल के रूप में हुई है। दोनों ने 2 मई को अपरान्ह अपने परिजनों को फोन कर इस आत्मघाती कदम के बारे में भी बताया। परिजनों को जैसे ही इसकी जानकारी हुई, वे शाम 6 बजे शिशुपाल पर्वत पहुंचे। पर्वत की तलहटी में युवक की बाइक मिली। परिजनों ने रात 12 बजे तक उन्हें ढूंढने का प्रयास किया लेकिन अंधेरा अधिक होने के कारण कुछ पता नहीं चला।
अगले दिन कल रविवार की सुबह दोबारा खोजबीन करने पर दोनों के क्षत-विक्षत शव नीचे खाई में मिले। जानकारी मिली है कि 2 मई की शाम युवती की चीख सुनकर आसपास के लोग शिशुपाल पर्वत पहुंचे थे। उस वक्त अंधेरा हो रहा था। इसलिए ग्रामीण शवों को देख नहीं पाए। दूसरे दिन ग्रामीणों ने भी इसकी सूचना पुलिस को दी तो सूचना मिलते ही बलौदा थाने की पुलिस टीम फ ोरेंसिक एक्सपट्र्स के साथ मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भिजवाया।
मिली जानकारी के अनुसार युवक युवती शादी करना चाहते थे। लेकिन नाबालिग होने के चलते बात नहीं बनी। मृतक दिलेश साहू अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और कक्षा बारहवीं की पढ़ाई कर रहा था। बुढ़ापे के एकमात्र सहारे को इस तरह खो देने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातम पसरा हुआ है और हर कोई इस घटना से स्तब्ध है। वहीं नाबालिग छात्रा कक्षा 10वीं में पढ़ाई कर रही थी।
गौरतलब है कि शिशुपाल पर्वत लोगों के घूमने की पसंदीदा जगह है लेकिन शांत और सूनसान इलाका होने के चलते लोग यहां आत्मघाती कदम उठाते हैं। बीते 5 सालों में अब तक करीब 15 लोगों की यहां मौत हो चुकी है। सेल्फ ी और पर्वत चढ़ाई के दौरान ज्यादा हादसे होते हंै। यह पहाड़ी चढ़ाई के लिए खतरनाक मानी जाती है। बावजूद लोग बिना सुरक्षा के चढ़ाई करते हंै। यहां ज्यादातर मौतें गिरने से हुई हैं।
इस पहाड़ी पर पत्थर को काटकर चढ़ाई के लिए रास्ता बनाया गया है।
खतरनाक मोड़ों और ऊंचाई वाले पॉइंट्स पर न तो कोई मजबूत बैरिकेडिंग रेलिंग है और न ही निगरानी के लिए सुरक्षाकर्मी। पूरे क्षेत्र में कहीं भी ऐसे बोर्ड नहीं लगे हैं जो लोगों को खतरे के प्रति आगाह कर सकें। इन सभी व्यवस्थाओं के आभाव में ही ऐसी घटनाएं लगातार दोहराई जा रही हैं।
शिशुपाल पर्वत में की निगरानी की जिम्मेदारी फ ॉरेस्ट विभाग की है। यहां पर्वत चढ़ाई के लिए रस्सी का उपयोग किया जाता है। लेकिन सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं है। जबकि पर्वत चढ़ाई के लिए 20 रुपए शुल्क लिया जाता है। इसके अलावा बाइक का पार्किंग शुल्क 10 रुपए और चार पहिया वाहन का 20 रुपए लिया जाता है। यहां घूमने पहुंचने वाले लोग खाना खाने के बाद प्लास्टिक पॉलीथीन पहाड़ी में ही फेंक देते हंै। इससे यहां गंदगी व प्रदूषण का अंबार लगा रहता है। इस स्थान पर छत्तीसगढ़ के अलावा ओडि़शा समेत आसपास राज्य के लोग ज्यादा घूमने पहुंचते हैं।
बहरहाल इस घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त लहजे में मांग की है कि ऐसी दुर्घटनाओं से बचने के लिए खतरनाक ऊंचाइयों पर लोहे की मजबूत रेलिंग लगाई जाए। संवेदनशील पॉइंट्स पर सीसी कैमरे और सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएं। आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए साइकोलॉजिकल वॉर्निंग बोर्ड लगाए जाएं।


