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झाडफ़ूंक , ‘चमत्कारी’ इलाज के चलते युवती की मौत, आरोपी महिला को उम्रकैद
01-May-2026 5:43 PM
झाडफ़ूंक , ‘चमत्कारी’  इलाज के चलते युवती की मौत, आरोपी महिला को उम्रकैद

अदालत ने कहा—यह आस्था नहीं, अपराध है

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 1 मई। गरियाबंद जिले में झाड़ फूंक के दौरान युवती की मौत के मामले में शुक्रवार को जिला अदालत ने फैसला सुनाया है। आरोपी महिला ईश्वरी साहू प्रभु यीशु के नाम पर चमत्कारी इलाज का दावा करता थी। विशेष अदालत ने आरोपी को महिला की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया, और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य है ।

मामले के अनुसार, घटना 1 जनवरी 2025 से 22 मई 2025 के बीच की है, जब आरोपी महिला ने गरियाबंद जिले की सुरसाबांधा निवासी ईश्वरी साहू ने राजिम निवासी योगिता सोनवानी (18 वर्ष) की इलाज का जिम्मा लिया। युवती को मानसिक और शारीरिक रूप से अस्वस्थ बताई गई थी और उसके परिवार ने आधुनिक चिकित्सा के बजाय पारंपरिक झाड़-फूंक और घरेलू उपायों का सहारा लिया। आरोपी महिला ईश्वरी साहू ने प्रभु यीशु के नाम पर ‘चमत्कारी’ इलाज का दावा किया। युवती को अपने पास रखकर इलाज करने लगी।

यह बताया गया कि आरोपी ने युवती को ठीक करने के नाम पर उसे सरसों का तेल और गर्म पानी पिलाया, उसके शरीर पर तेल डाला और लगातार धार्मिक मंत्रोच्चार तथा प्रार्थना के माध्यम से इलाज का दावा किया। युवती की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय इसी तरह के उपचार जारी रखे गए। अंतत: 22 मई 2025 को युवती की मौत हो गई ।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी महिला ने परिवार को भरोसा दिलाया था कि बच्ची को ईश्वरीय शक्ति से ठीक किया जा सकता है और बाहरी इलाज की जरूरत नहीं है। इस विश्वास के चलते परिवार ने चिकित्सकीय सहायता लेने में देर की, जो अंतत: युवती की मौत का कारण बना। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से परखा और पाया कि यह न केवल धोखाधड़ी है, बल्कि जानबूझकर की गई लापरवाही और आपराधिक कृत्य है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डॉक्टरों की गवाही ने मामले को और स्पष्ट किया। रिपोर्ट में बताया गया कि युवती की मौत शरीर में गंभीर जलन और आंतरिक क्षति के कारण हुई। शरीर पर तेल और गर्म पानी के प्रयोग से हुए नुकसान के संकेत मिले। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि समय पर सही इलाज मिलने पर बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। अदालत ने इन साक्ष्यों को निर्णायक माना ।अदालत ने गवाहों के बयानों को विश्वसनीय माना और यह कहा कि आरोपी महिला ने अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया ।

विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी अधिनियम) पंकज कुमार सिन्हा की अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 105 (हत्या से संबंधित प्रावधान) सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत दोषी पाया। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम और टोनही प्रताडऩा निवारण अधिनियम के प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि आरोपी का कृत्य अंधविश्वास को बढ़ावा देने के साथ-साथ कानून का गंभीर उल्लंघन भी है ।

फैसले में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आस्था और अंधविश्वास के बीच एक स्पष्ट रेखा होती है। जहां आस्था व्यक्तिगत विश्वास तक सीमित रहती है, वहीं अंधविश्वास तब अपराध बन जाता है जब वह किसी की जान को खतरे में डालता है। इस मामले में आरोपी ने न केवल गलत उपचार किया, बल्कि परिवार को भी गुमराह किया और चिकित्सा सहायता से दूर रखा। अदालत ने इसे मानवता के खिलाफ कृत्य बताया।अदालत ने इस संदर्भ में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सख्त सजा ही निवारक उपाय हो सकती है । अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी महिला ईश्वरी साहू को दोषी पाया, और उम्रकैद की सजा व 2 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। 

यही नहीं, आरोपी को धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 की धारा 4 के तहत 1 वर्ष कारावास व 1,000 रुपये जुर्माना  टोनही प्रताडऩा निवारण अधिनियम, 2005 की धारा 6 एवं 7 के तहत प्रत्येक में 1-1 वर्ष कारावास व एक-एक हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।


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