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हाईकोर्ट ने सीयू के प्रोफेसर की याचिका खारिज की
30-Apr-2026 5:22 PM
 हाईकोर्ट ने सीयू के प्रोफेसर की याचिका खारिज की

एनएसएस कैंप में जबरन नमाज पढ़ाने का विवाद

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 30 अप्रैल। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें एनएसएस कैंप के दौरान छात्रों को कथित रूप से नमाज पढ़ने के लिए मजबूर करने के मामले में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के आरोपों की सच्चाई का परीक्षण केवल ट्रायल के दौरान ही संभव है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने प्रोफेसर दिलीप झा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मामले में पहले ही जांच पूरी कर चार्जशीट पेश की जा चुकी है, ऐसे में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 528 के तहत असाधारण हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

प्रोफेसर झा ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि वह केवल प्रशासनिक भूमिका में थे और कथित घटना के समय मौजूद भी नहीं थे। साथ ही उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। हालांकि राज्य पक्ष की दलीलों से सहमति जताते हुए कोर्ट ने कहा कि झा की अग्रिम जमानत और उनकी अनुपस्थिति जैसे बचाव के बिंदु ट्रायल के दौरान जिरह में उठाए जा सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस स्तर पर हस्तक्षेप करना तथ्यों का पूर्व आकलन करने जैसा होगा, जो न्यायसंगत नहीं है।

कोटा क्षेत्र के शिवतराई में 7 दिवसीय एनएसएस शिविर 26 मार्च से 1 अप्रैल 2025 तक रखा गया था। इसमें 159 छात्रों ने हिस्सा लिया था। आरोप है कि 30 मार्च, जो ईद-उल-फितर का दिन था, मंच पर चार मुस्लिम छात्रों को नमाज अदा करने के लिए बुलाया गया और अन्य छात्रों पर भी इसमें शामिल होने का दबाव बनाया गया। विरोध करने वाले छात्रों को प्रमाण पत्र रद्द करने की धमकी देने का भी आरोप है।

इस मामले में पटेल हॉस्टल निवासी छात्र आस्तिक साहू ने 14 अप्रैल 2025 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। प्रारंभिक जांच में प्रोफेसर झा समेत कुछ अन्य शिक्षकों की भूमिका सामने आने के बाद 26 अप्रैल को विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद 29 मई 2025 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई।

कोटा के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने 7 अक्टूबर 2025 को इस चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ेगी।


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