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‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : विदेशी सैलानियों पर यौन हमलों से पर्यटन कारोबार की तबाही का अंदाज है?
सुनील कुमार ने लिखा है
23-Apr-2026 8:43 PM
‘छत्तीसगढ़’ का  संपादकीय : विदेशी सैलानियों पर यौन हमलों से पर्यटन कारोबार की तबाही का अंदाज है?

कर्नाटक में कूर्ग का इलाका बड़ा खूबसूरत माना जाता है, और वहां पर्यटक भी बहुत पहुंचते हैं। राज्य सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए, और पर्यटकों को भारतीय जनजीवन की बेहतर झलक दिखाने के लिए घरों में पर्यटकों के ठहरने का एक नया कार्यक्रम शुरू किया है। देश के कई और पर्यटन केन्द्रों पर ऐसा पहले से भी चल रहा है, और कई विदेशी सैलानी कमखर्च में भारत देखने के लिए, यहां का पारिवारिक जीवन देखने के लिए भी परिवारों में रूकते हैं। कर्नाटक में अभी ऐसे ही एक होम-स्टे में रूकी हुई एक अमरीकी पर्यटक महिला को उसी जगह काम करने वाले एक कर्मचारी ने किसी ड्रिंक में नशा घोलकर पिला दिया, और फिर उसके साथ बलात्कार किया। इसके सुबूत मिटाने, और महिला शिकायत न कर सके इसलिए वाईफाई बंद कर देने का काम भी किया गया। बाद में किसी तरह इस महिला ने बाहर निकलकर अमरीकी दूतावास को खबर की, और इस घर के मालिक-नौकर को गिरफ्तार किया गया। कुछ और लापरवाहियां भी सामने आई हैं कि कर्नाटक में इस घर ने अपने को पर्यटकों को ठहराने के लिए रजिस्टर भी नहीं करवाया था।

दूसरे देशों से भारत आने वाले लोगों से इस देश का करोड़ों लोगों का जीवन चलता है। एक अंदाज यह है कि पर्यटन से सीधे, और किसी और तरह से करीब साढ़े 8 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं। भारत की जीडीपी में इस सेक्टर का योगदान करीब सवा 5 फीसदी है। ऐसी एक-एक घटना न केवल उस पर्यटक के अपने देश में, बल्कि भारत आने की सोच रहे और तमाम लोगों के बीच भी हौसला पस्त करती है। अलग-अलग कुछ प्रमुख देश अपने नागरिकों के लिए समय-समय पर ऐसी चेतावनी जारी करते आए हैं कि भारत अकेली महिला पर्यटक के लिए सुरक्षित नहीं है। अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, और ब्रिटेन जैसे प्रमुख देशों ने अपने नागरिकों को यह सलाह दे रखी है जिसमें भारत में विदेशी महिलाओं के साथ होने वाले यौन-अपराधों का जिक्र किया गया है, उन्हें भारत में कहीं भी अकेले न घूमने की सलाह दी गई है, और यह भी कहा गया है कि होटल या होम स्टे में अनजान लोगों से खाने-पीने की चीजें न लें, क्योंकि इनमें नशा मिला होने का खतरा रहता है।

यह देश कहने के लिए अतिथि देवो भव: की परंपरा का दावा करता है, लेकिन हमने विदेशी सैलानियों के साथ सार्वजनिक जगहों पर दिनदहाड़े देसी लोगों द्वारा तरह-तरह की बदसलूकी के कितने ही वीडियो देखे हैं। बदसलूकी से थोड़ा सा कम अगर देखें, तो किसी भी गोरी या विदेशी महिला के आसपास के हिन्दुस्तानी लडक़े और मर्द उसके साथ अपनी सेल्फी खिंचवाना अपना कानूनी हक समझते हैं। इस देश में अपने लोगों के साथ भी बलात्कार एक किस्म से पार्ट टाईम काम हो गया है, ऐसे में विदेशियों के प्रति यहां के लोगों का मोह सिर चढक़र बोलने लगता है। भारत अपने आपमें एक पूरे योरप जितना बड़ा विविधता वाला देश है। इसके कश्मीर का केरल से कोई भी मेल नहीं है, पश्चिम के गुजरात और राजस्थान से उत्तर-पूर्व के राज्यों का कोई मेल नहीं है, इसलिए यहां दुनिया भर के पर्यटक आते हैं क्योंकि एक वीजा से, एक देश के भीतर उन्हें कई देशों को घूमने जैसा फायदा मिल जाता है। भारत का पर्यटन उद्योग बहुत छोटे-छोटे से स्थानीय लोगों को रोजगार देता है, और किसी एक महिला पर्यटक के साथ बलात्कार जैसी घटना शायद दसियों हजार महिला पर्यटकों का भारत आने का इरादा बदल देती होगी।

भारत में चाहे जो सोचकर सरकार होम स्टे की छूट देती है, या उसे बढ़ावा देती है, उससे जुड़े हुए खतरों को न समझना देश के इस बहुत बड़े कारोबार को नुकसान पहुंचाएगा। एक रिपोर्ट बतलाती है कि एक-दो बलात्कारों के बाद ही महिला पर्यटकों के भारत आने में पिछले दो साल में करीब 12 फीसदी की गिरावट आई है। अब लोग छुट्टियां मनाने के लिए भारत की जगह वियतनाम, श्रीलंका, और थाईलैंड को प्राथमिकता दे रहे हैं जो कि पर्यटक सुरक्षा के मामले में भारत से ऊपर माने जाते हैं। भारत में एक औसत विदेशी पर्यटक ढाई-तीन हजार डॉलर खर्च करते हैं, जो कि ढाई-तीन लाख रूपए के बराबर होता है। इसमें होटल, टैक्सी, रेस्त्रां, ढाबे, गाईड, हस्तशिल्पी जैसे दर्जनों अलग-अलग पेशे के करोड़ों लोगों को काम मिलता है। अब एक दिक्कत यह है कि बलात्कार जैसे संगीन जुर्म करने वालों से परे राह चलती विदेशी सैलानी महिला को घेरकर उसके साथ तरह-तरह की छेडख़ानी, और बदसलूकी करने वाले हर शहर में मिल जाते हैं। जिन शहरों में विदेशी सैलानियों का लगातार आना-जाना रहता है, जहां लोग गोरी या किसी और रंग की चमड़ी को देखने के आदी हैं, वहां भी किसी महिला को देखते ही मर्दों के दिल कुलबुलाने लगते हैं। यह सिलसिला भारत की साख को बहुत बुरी तरह चौपट कर रहा है।

अब एक देश के रूप में भारत को यह सोचने की जरूरत है कि महिलाओं के प्रति जो एक आम हिकारत एक आम भारतीय मर्द के दिल-दिमाग में है, उसे दूर किए बिना क्या सचमुच ही विदेशी सैलानी महिलाओं के प्रति किसी के मन में सम्मान पैदा किया जा सकता है? जो लोग देश के भीतर महिलाओं के हर किस्म के शोषण में लगे रहते हैं, और बड़े चर्चित बाबाओं से लेकर नेताओं तक के जितने तरह के वीडियो आते हैं, उनसे पता लगता है कि देश की संस्कृति क्या हो गई है। जो लोग ऐसी संस्कृति के बीच बड़े होते हैं, वे पर्यटन कारोबार को ध्यान में रखकर पर्यटन महिलाओं का सम्मान करने लगेंगे, यह उम्मीद तो आम भारतीय मर्द पर बहुत बड़ी ज्यादती होगी। किसी भी देश में यह नहीं हो सकता कि वहां महिला के साथ तो हर तरह की ज्यादती होती रहे, और मेहमान या पर्यटक महिला का सम्मान हो।

एक दूसरी बात हमें यह लगती है कि कारोबारी होटल में तो सरकार की भी नजर रह सकती है, और वहां ठहरने वाले पर्यटकों को भी होटल के कमरों का कुछ अंदाज रहता है। लेकिन घरों में पर्यटक ठहराने वाले लोग तो एक अनौपचारिक इंतजाम रखते हैं, सारा माहौल घर जैसा रहता है, और वैसे में यह भरोसा कर पाना कुछ मुश्किल है कि मौका मिलने पर भी वहां काम करने वाले, या वहां के मालिक मर्द खुफिया कैमरे लगाकर रिकॉर्डिंग नहीं करेंगे, तांक-झांक नहीं करेंगे, या मौका मिलते ही यौन-शोषण की कोशिश नहीं करेंगे। इस देश में महिलाओं के साथ यौन-अपराधों का माहौल ऐसा बना हुआ है कि खुद भारत सरकार और प्रदेशों की सरकारों को होम स्टे के खतरों के बारे में जरूर ही सोचना चाहिए। इस देश के मर्द इस लायक नहीं है कि उनके घर पर ठहरी हुई विदेशी महिला पर्यटकों के साथ वे अच्छा बर्ताव कर सकें। इस खतरे को जानते-समझते हुए ही केन्द्र और राज्य सरकारों को अपनी पर्यटन नीतियां तय करना चाहिए। सार्वजनिक जगहों पर बदसलूकी करने वाले स्थानीय लोगों के साथ सरकार क्या कार्रवाई करती है, इसका अच्छा प्रचार होना चाहिए ताकि बाकी लोगों को भी बदसलूकी के बाद जेल जाने के खतरे समझ में आ सकें। एक पर्यटक के साथ बदसलूकी करने वाले लोग हिन्दुस्तान के 8-10 लोगों की मजदूरी और कमाई तबाह करते हैं, ऐसा एक अंदाज पर्यटन उद्योग का है, इस बात का अंदाज आम लोगों को नहीं होगा।    (क्लिक करें : सुनील कुमार के ब्लॉग का हॉट लिंक) 


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