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निजी डेटा का संग्रह नहीं किया जाता: खुफिया जानकारी के उपयोग पर गृह मंत्रालय का स्पष्टीकरण
31-Mar-2026 8:54 PM
निजी डेटा का संग्रह नहीं किया जाता: खुफिया जानकारी के उपयोग पर गृह मंत्रालय का स्पष्टीकरण

नयी दिल्ली, 31 मार्च। गृह मंत्रालय ने एक संसदीय समिति को बताया है कि सुरक्षा एजेंसियां जानकारी जुटाने के लिए सोशल मीडिया सहित सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त खुफिया जानकारी का उपयोग करती हैं। इसके साथ ही मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि निजी डेटा का संग्रह नहीं होने के कारण निजता का कोई उल्लंघन नहीं होता है।

मंत्रालय ने लोकसभा सदस्य निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी स्थायी समिति (2024-25) के समक्ष यह जानकारी दी, जिसने सोमवार को अपनी रिपोर्ट पेश की।

समिति ने मंत्रालय से यह जानना चाहा था कि इंटरनेट और सोशल मीडिया से जानकारी जुटाते समय वह निजता के मुद्दे से कैसे निपटता है।

मंत्रालय ने समिति से कहा, ‘‘इंटरनेट और सोशल मीडिया मंचों पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का उपयोग खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया जाता है। सोशल मीडिया से कोई निजी या व्यक्तिगत जानकारी नहीं एकत्र की जाती है। इसलिए, निजता का कभी उल्लंघन नहीं होता है।’’

मंत्रालय ने कहा कि अधिकृत सुरक्षा एजेंसियां केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों से ‘‘ओपन-सोर्स’’ तकनीक का उपयोग कर जिस प्रकार का डेटा एकत्र कर सकती हैं, उसमें सोशल मीडिया पोस्ट जैसे सार्वजनिक ट्वीट, फेसबुक पोस्ट, यूट्यूब वीडियो, ‘डीपफेक’ या फर्जी खबरें या गलत सूचनाएं शामिल हो सकती हैं, जिनमें सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाली वायरल भड़काऊ सामग्री भी शामिल है।

इस तकनीक का उपयोग धोखाधड़ी वाली वेबसाइटों या लिंक की निगरानी के लिए किया जा सकता है, उदाहरण के लिए ऑनलाइन जुआ, नौकरी घोटाले और फर्जी निवेश घोटाले आदि में। इस प्रक्रिया के उदाहरण देते हुए मंत्रालय ने कहा कि इसका उपयोग वैवाहिक और ‘डेटिंग’ मंचों पर धोखाधड़ी के लिए, और ‘‘डार्क वेब से क्रिप्टोकरेंसी’’ संबंधी पते प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है।

मंत्रालय ने समिति को बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग खुफिया जानकारी जुटाने और खुफिया-रोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, जिसमें चेहरे की पहचान, सोशल मीडिया विश्लेषण और नेटवर्क विश्लेषण, पैटर्न विश्लेषण और छिपे हुए संबंध आदि प्रमुख अनुप्रयोग शामिल हैं।

गृह मंत्रालय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि यह सुरक्षा एजेंसियों को विशाल डेटासेट का तेजी से विश्लेषण करके, विसंगतियों का पता लगाकर खुफिया जानकारी जुटाने और आतंकवाद-रोधी प्रयासों के लिए अपनी क्षमताओं को बढ़ाने में मदद कर रही है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया, गति और सटीकता में सुधार हो रहा है। (भाषा)


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