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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 26 फरवरी। छत्तीसगढ़ में सालों से अटके निष्पादन (एक्जीक्यूशन) मामलों को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य के सभी जिला न्यायालयों के लिए नई प्रैक्टिस गाइडलाइन जारी की है। अब नए निष्पादन मामलों का निपटारा दाखिल होने की तारीख से अधिकतम छह महीने के भीतर करना अनिवार्य होगा।
यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के चर्चित मामले पेरियाम्मल विरुद्ध राजमणि के आदेश के पालन में जारी किए गए हैं। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि डिक्री होल्डर (जिसके पक्ष में फैसला आया है) को उसका कानूनी अधिकार बिना देरी मिले, यह सुनिश्चित करना जरूरी है।
राज्य के जिला न्यायालयों में वर्षों से लंबित पड़े निष्पादन मामलों की पहचान कर उनका भौतिक सत्यापन किया जाएगा। प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज हर महीने ऐसे मामलों की समीक्षा करेंगे।
साथ ही, कुर्की और कब्जा वारंट जैसे आदेशों के पालन में देरी न हो, इसके लिए जिला दंडाधिकारी को हर महीने प्रगति रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा है कि सुनवाई और केस मॉनिटरिंग में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी डिजिटल सुविधाओं का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जाए। इससे समय की बचत होगी और प्रक्रिया तेज होगी।
अदालत ने साफ किया है कि जो याचिकाएं या आवेदन जानबूझकर कार्यवाही में बाधा डालने या देरी करने के लिए दायर किए जाते हैं, उनसे सख्ती से निपटा जाएगा।
इसके अलावा कोर्ट स्टाफ के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि वारंट निष्पादन, नीलामी और अन्य प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो सकें।


