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हाईकोर्ट ने नाइट लैंडिंग, स्टाफ और फ्लाइट शेड्यूल पर हलफनामा मांगा
26-Feb-2026 11:59 AM
हाईकोर्ट ने नाइट लैंडिंग, स्टाफ और फ्लाइट शेड्यूल पर हलफनामा मांगा

बिलासपुर में हवाई सेवाओं को लेकर दाखिल पीआईएल पर सुनवाई

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 26 फरवरी। बिलासपुर से हवाई सेवाओं के विस्तार को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर बुधवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने राज्य सरकार के विमानन विभाग के डायरेक्टर को हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि एयरपोर्ट के विकास, नाइट लैंडिंग सुविधा और स्टाफ की उपलब्धता पर पूरी जानकारी दी जाए।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पहली नजर में राज्य और केंद्र सरकार काम करते दिख रहे हैं, इसलिए उन्हें समय देना उचित होगा। लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि काम की असली स्थिति कागज पर बताई जाए।

अदालत ने निर्देश दिया है कि बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर की वर्तमान हालत, आगे होने वाले काम, नाइट लैंडिंग लाइसेंस मिलने के बाद पर्याप्त स्टाफ है या नहीं, और गर्मी के शेड्यूल में कितनी उड़ानें चलेंगी- इन सब पर विस्तृत हलफनामा दाखिल किया जाए।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से अधिवक्ता अनुमेह श्रीवास्तव ने नाइट लैंडिंग से जुड़ा नोटिस टू एयरमेन (नोटाम) कोर्ट में पेश किया। इसके अनुसार, 30 दिनों बाद बिलासपुर एयरपोर्ट नाइट लैंडिंग के लिए खोला जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता रामाकांत मिश्रा और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कहा कि दोनों सरकारें एयरपोर्ट के आगे के विकास को लेकर गंभीर हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने दलील दी कि नाइट लैंडिंग की सुविधा तभी पूरी तरह काम करेगी जब पर्याप्त स्टाफ तैनात हो। बिना स्टाफ के यह सुविधा केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी।

अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने भी कहा कि एयरपोर्ट विकास के लिए जो राशि राज्य सरकार ने बजट में रखी है, वह किन-किन कामों पर खर्च होगी, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने गर्मी के शेड्यूल में पर्याप्त उड़ानें सुनिश्चित करने की मांग की और प्रयागराज की उड़ानों में कमी का मुद्दा भी उठाया।

सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने मामले को मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया। तब तक राज्य सरकार के विमानन विभाग के डायरेक्टर को सभी बिंदुओं पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करना होगा।

अब सबकी नजर मार्च की सुनवाई पर है। शहर के लोगों को उम्मीद है कि कोर्ट की सख्ती के बाद बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास और उड़ानों की संख्या को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।


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