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हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटा, दो शिक्षिकाओं को भी सात-सात साल की सजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 26 फरवरी। चौथी कक्षा में पढ़ने वाली 9 साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपी फादर प्रिंसिपल को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। साथ ही दो महिला शिक्षिकाओं को भी सात-सात साल की जेल और जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने निचली अदालत के बरी करने के फैसले को पलट दिया।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि दुष्कर्म या यौन उत्पीड़न की पीड़िता किसी अपराध की साझेदार नहीं होती। उसकी गवाही को कानून में अलग से किसी पुष्टि की जरूरत नहीं है।
अदालत ने कहा कि अगर पीड़िता का बयान स्वाभाविक, भरोसेमंद और एक जैसा है, और उसमें कोई बड़ी कमी नहीं है, तो उसी के आधार पर सजा दी जा सकती है। इस मामले में बच्ची की गवाही शुरू से अंत तक विश्वसनीय पाई गई।
सरकार ने सत्र न्यायालय द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने सबूतों और मेडिकल रिपोर्ट को सही मानते हुए निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया।
अदालत ने ज्योति मिशन स्कूल, कोरिया जिले के फादर प्रिंसिपल जोसेफ धन्ना स्वामी को उम्रकैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, घटना को रोकने की बजाय बच्ची को डांटने और मारने की आरोपी दो शिक्षिकाओं फिलोमेना केरकेट्टा और किसारिया को सात-सात साल की सजा और 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
यह मामला सितंबर 2015 का है। चिरमिरी की एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी 9 साल की बेटी, जो ज्योति मिशन स्कूल के हॉस्टल में रहती थी, अस्वस्थ होने की जानकारी देकर उसे बुलाया।
बच्ची ने मां को बताया कि रात में उसे यूरिन में ब्लड आने लगा था। वह उठकर बाथरूम गई। लड़कियों का बाथरूम बंद होने के कारण वह लड़कों के बाथरूम में गई। वहां फर्श पर सफेद रंग का पाउडर पड़ा था। बाथरूम से लौटने पर उसे चक्कर आने लगे। बाद में सोते समय एक व्यक्ति ने उसके साथ गलत हरकत की कोशिश की। विरोध करने पर वह भाग गया। बच्ची ने जब यह बात स्कूल की शिक्षिकाओं को बताई, तो उसे चुप रहने के लिए कहते हुए डांटा-फटकारा गया और किसी को न बताने की हिदायत दी गई।
मेडिकल जांच में चोट और रक्तस्राव की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में निचली अदालत ने सभी को बरी कर दिया था।


