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जनगणना एक भी व्यक्ति या परिवार छूटना नहीं चाहिए- सीएम साय
18-Feb-2026 3:31 PM
जनगणना एक भी व्यक्ति या परिवार छूटना नहीं चाहिए- सीएम साय

छत्तीसगढ़ राज्य व संभाग स्तरीय अधिकारियों का प्रशिक्षण सम्मेलन आयोजित

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

रायपुर, 18 फरवरी  । बुधवार को  जनगणना-2027 के लिए आयोजित राज्य एवं संभाग स्तरीय अधिकारियों का प्रशिक्षण सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने  प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व को पूरी गंभीरता, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ निभाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना प्रशासन की विश्वसनीयता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। यदि आंकड़े अधूरे या त्रुटिपूर्ण होंगे तो विकास योजनाओं का लक्ष्य प्रभावित होगा। एक भी व्यक्ति या परिवार छूटना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे विकास की प्रक्रिया अधूरी रह सकती है।

उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से डेटा संकलन किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी होगी। छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। यह कार्य प्रदेश के 33 जिलों, 252 तहसीलों और 19,978 गाँवों में संपन्न किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-गणना की सुविधा से जनभागीदारी बढ़ेगी।

मुख्य सचिव  विकासशील ने अधिकारियों से सभी निर्धारित कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने प्रगणकों के प्रशिक्षण में सपोर्टिव सुपरविजन की तकनीक अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मियों को निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग मिलना चाहिए, जिससे त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो।

उन्होंने नई भवन अनुज्ञाओं को पूर्व से ही ट्रेस करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि मकान सूचीकरण के दौरान कोई संरचना छूट न जाए। साथ ही सीमावर्ती जिलों के संदर्भ में उन्होंने वर्ष 2001 के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में गए व्यक्तियों की गणना में दोहराव से बचने के लिए विशेष सावधानी बरती जाए।

इस अवसर पर भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त  मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि भारतीय जनगणना गाँव, कस्बा और वार्ड स्तर तक प्राथमिक आँकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएँ, परिसंपत्तियाँ, जनसांख्यिकीय विवरण, धर्म, अनुसूचित जाति-जनजाति, भाषा, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रव्रजन एवं प्रजनन से संबंधित सूक्ष्म एवं विश्वसनीय आँकड़े संकलित किए जाते हैं।

नोडल अधिकारी अपर मुख्य सचिव  मनोज पिंगुआ ने कलेक्टरों को जनगणना से संबंधित कार्यों के बारे में विस्तार से दिशा-निर्देश दिए। राज्य स्तरीय  सम्मेलन में  विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर,  निगम आयुक्त एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।


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