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‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल के पाकिस्तानी मलाल को ठीक से पढ़ें
सुनील कुमार ने लिखा है
12-Feb-2026 5:44 PM
‘छत्तीसगढ़’ का  संपादकीय : टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल के पाकिस्तानी मलाल को ठीक से पढ़ें

पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ का अमरीका के खिलाफ ताजा बयान हैरान करने वाला जरूर है, लेकिन उसमें कही गई बात अटपटी नहीं है। संसद में रक्षामंत्री ने कहा कि अमरीका ने पाकिस्तान को टॉयलेट पेपर से भी बुरी तरह इस्तेमाल किया। एक मकसद के लिए इस्तेमाल किया, और फेंक दिया। यह बयान उन्होंने अफगान युद्ध, और अमरीका के साथ पाकिस्तान के पुराने रिश्तों की बात करते हुए दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अमरीका के लिए खुद को भाड़े पर उपलब्ध कराया, लेकिन अमरीका ने काम पूरा होने पर पाकिस्तान को छोड़ दिया। उन्होंने यह बात 2021 में अमरीका के अफगानिस्तान छोडक़र अचानक निकल जाने के संदर्भ में भी कही कि अमरीका ने पाकिस्तान को अधर में और अकेला छोड़ दिया। उन्होंने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनातनी को लेकर यह कहा कि पाकिस्तान की पिछली सरकारों ने जिहाद के नाम पर पाकिस्तानियों को लडऩे और मरने के लिए अफगान मोर्चे पर भेजा। उन्होंने यह भी कहा कि इन जंगों को जायज ठहराने के लिए पाकिस्तान के पढ़ाई के कोर्स तक में बदलाव किया गया जिसे आज तक नहीं सुधारा जा सका है।

पाकिस्तानी रक्षामंत्री की इस ताजा बात को भारत के मीडिया में इस तरह की सुर्खी के साथ पेश किया जा रहा है कि मानो आज डॉनल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को धोखा दे दिया है, और उसे इस्तेमाल हो चुके टॉयलेट पेपर की तरह फेंक दिया है। खैर, हम ट्रंप या उसके पहले से अमरीकी राष्ट्रपतियों की पाकिस्तान नीति को लेकर बहुत ज्यादा फर्क नहीं देखते, सिवाय इसके कि क्रिप्टोकरेंसी, और कई किस्म के खनिजों को लेकर ट्रंप आज पाकिस्तान का बुरी तरह दोहन करना चाहता है, और उसे इस्तेमाल करना चाहता है। आज की पाकिस्तानी सरकार की मजबूरी यह है कि आज दुनिया की बहुत सी कमजोर अर्थव्यवस्थाओं की तरह वह भी ट्रंप के रहमोकरम पर जिंदा है। दुनिया का सबसे बददिमाग फौजी तानाशाह जब अपनी सारी कारोबारी ताकत को भी लेकर पूरी दुनिया में अपना एक छत्रराज कायम करना चाहता है, उसके लिए हर दर्जे की गुंडागर्दी करने पर आमादा है, दोस्तों से दुश्मनी करने, और दुश्मनों को गले लगाने के लिए एक पैर पर खड़ा है, तो वैसे में पाकिस्तान अमरीका के सामने अपनी खुद की ताकत पर तो एक भुनगे से अधिक नहीं है। यह एक अलग बात है कि अफगानिस्तान, भारत, और चीन के बीच की उसकी भौगोलिक स्थिति के चलते अमरीका उसे इस्तेमाल करते आया है, और यह जारी भी रहेगा। पिछली अमरीकी सरकारें, जो कि ट्रंप जितनी बददिमाग नहीं थीं, वे भी पाकिस्तान सहित बहुत से देशों को टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल करते आई हैं, और दुनिया को एक अहंकारी और साम्राज्यवादी अमरीका से कुछ बेहतर उम्मीद भी नहीं करना चाहिए। ट्रंप अमरीकी गुंडागर्दी की इतिहास की सबसे बुरी मिसाल है, और अमरीका सहित तमाम कमजोर देशों को इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि ट्रंप उन्हें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल करके फेंक सकता है।

दुनिया में अंतरराष्ट्रीय संबंधों, और वैश्विक तालमेल का युग ट्रंप के आने से खत्म हो चुका है। इसके साथ-साथ लोगों को अब यह बात समझ आ रही है कि ट्रंप की पार्टी का कोई अगला राष्ट्रपति बनने पर उसके सामने यह मिसाल मौजूद रहेगी कि गुंडागर्दी से दुनिया को घुटनों पर कैसे लाया जाता है। इसलिए पर्यावरण से लेकर फौजी समझौतों तक, और यूएसएड से लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन तक सबने ट्रंप से जो धोखा खाया है, उस ठोकर से लोग तीन साल के बकाया टं्रपियापे के साथ जीना सीखने की कोशिश करेंगे। पाकिस्तानी रक्षामंत्री ने कल वहां की संसद में जो कहा है, उसे इतिहास के जिक्र के बिना आज की शिकायत की तरह पेश करने का काम हिन्दुस्तानी सुर्खियों में किया गया है, और बहुत से लोगों को सुर्खियों के नीचे पढऩे की न दिलचस्पी रहती, न उनके पास समय रहता। इसलिए पाकिस्तान के कल के अफसोस को भारत में कई लोग आज का मानकर भी चल सकते हैं। लेकिन उससे अमरीका और पाकिस्तान की सेहत पर कोई ताजा फर्क नहीं पड़ेगा, पाकिस्तान के खिलाफ कुछ सुनने के लिए बेताब लोग कुछ देर के लिए जरूर खुश हो सकते हैं।

वैसे पाकिस्तान का पुराना तजुर्बा, और उसका ताजा दर्द आज भी दुनिया में जगह-जगह देशों के अपने तजुर्बों की शक्ल में गूंज रहा है। पूरे योरप, नाटो के तमाम देश, डब्ल्यूएचओ, और यूएसएड से मदद पाने वाले देश, भारत सरीखे अमरीका के दशकों पुराने मजबूत साथी, इन सबको ट्रंप से जो धोखा हुआ है, उससे जो बेइज्जती मिली है, उनको भी लग रहा होगा कि वे टॉयलेट पेपर न सही, बल्कि हाथ या मुंह पोंछने वाले नेपकिन की तरह इस्तेमाल करके फेंक दिए गए हैं। ट्रंप इंसानियत से पूरी तरह अछूता, एक बेरहम कारोबारी है, जो कि पूरी तरह से आत्ममुग्ध तानाशाह है, जो अपने कार्यकाल को अमरीकी संविधान को कुचलकर भी आठ बरस से अधिक ले जाना चाहता है, जो पूरे अमरीका को अपनी निजी जागीर की तरह इस्तेमाल कर रहा है, और बाकी दुनिया पर भूमाफिया के अंदाज में अवैध कब्जा कर लेना चाहता है। उसकी गुंडागर्दी का जिक्र कम शब्दों में, कम विशेषणों के साथ मुमकिन ही नहीं है। इसलिए आज पाकिस्तानी संसद में वहां के रक्षामंत्री पिछली अमरीकी सरकारों को जिन शब्दों में कोस रहे हैं, उससे और अधिक बुरी शब्दों में दुनिया की कई संसदों में ट्रंपियापे को बरसों तक कोसा जाएगा। फिर यह भी है कि अभी तो इस ट्रंप के कार्यकाल का एक बरस ही गुजरा है, तीन बरस बाकी हैं, और उसके बाद अगर उसी की पार्टी का राष्ट्रपति बनता है, तो फिर दुनिया को अपने बसने के लिए कोई दूसरा ग्रह ढूंढ लेना चाहिए। धरती के साथ दिक्कत यह है कि आज उसे कोई दूसरी दुनिया नसीब नहीं है, वरना ट्रंप ने इसे रहने लायक छोड़ा नहीं है। पाकिस्तानी रक्षामंत्री ने ट्रंप के खिलाफ कुछ नहीं कहा है, वरना ट्रंप पाकिस्तान के हवाई अड्डे बंद करवा सकता है, आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है, टैरिफ लगा सकता है, पाकिस्तानियों के वीजा उसने वैसे ही रोक रखे हैं, अब वह पाकिस्तान को और अधिक हद तक कुचल सकता है, इसलिए आज दुनिया के अधिकतर देश ट्रंप के खिलाफ कुछ बोलने की हालत में नहीं हैं। पाकिस्तान जैसी बेबस अर्थव्यवस्था वाला देश भविष्य में भी कई बार कई सरकारों द्वारा टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, और आज भी एक बंद टॉयलेट के भीतर चीन उसका ऐसा इस्तेमाल कर रहा हो, तो भी क्या पता। अब चीन ट्रंप की तरह खुले में हगने सरीखी हरकतें करता नहीं है, इसलिए पता नहीं चलता कि वह अपने कर्ज से लदे, अपने पर मोहताज देशों को किस पेपर की तरह इस्तेमाल करता है। फिलहाल तो दुनिया के तमाम देशों को अपने पैरों पर इस तरह खड़े रहना सीखना चाहिए कि कोई भी बड़ी ताकत उसका रोल बनाकर...

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