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पट्टे की सीमा से पांच गुना अधिक खुदाई, हाईकोर्ट ने तत्काल रोकने का दिया आदेश
11-Feb-2026 11:02 AM
पट्टे की सीमा से पांच गुना अधिक खुदाई, हाईकोर्ट ने तत्काल रोकने का दिया आदेश

खनिज सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा तलब

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 11 फरवरी। राजधानी रायपुर से सटे आरंग क्षेत्र के निसदा गांव में अवैध खनन के मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन से जवाब मांगा है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने पट्टे की निर्धारित सीमा से बाहर किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 26 फरवरी को तय की गई है।

आरंग निवासी ओमप्रकाश सेन ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि गांव में फ्लैगस्टोन और चूना पत्थर खनन के लिए 15 लोगों को पट्टा दिया गया, लेकिन कई पट्टाधारकों ने स्वीकृत क्षेत्र से लगभग पांच गुना अधिक जमीन पर कब्जा कर खनन किया। याचिका में कहा गया है कि पर्यावरणीय स्वीकृति की अवधि समाप्त होने के बावजूद पिछले तीन वर्षों से ब्लास्टिंग और खुदाई निर्बाध रूप से जारी रही।

याचिका के अनुसार खनन से निकला मलबा और पत्थर सीधे महानदी में डाले जा रहे हैं। इससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रतिकूल असर पड़ा है। आसपास की लगभग 400 एकड़ कृषि भूमि बंजर होने की बात भी सामने आई है, जिससे ग्रामीणों की आजीविका पर संकट गहराया है।

मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने खनिज विभाग के सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि पट्टे की सीमा से बाहर खनन पर तत्काल रोक सुनिश्चित की जाए।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने बताया कि जांच के बाद कलेक्टर ने सात पट्टाधारकों पर 30 करोड़ रुपये का अर्थदंड अधिरोपित करते हुए नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि महानदी में मलबा डालने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई और वर्तमान जांच की स्थिति क्या है।

अदालत ने निर्देश दिया है कि यदि कोई पट्टाधारक इस कार्रवाई के विरुद्ध अलग याचिका दायर करता है, तो उसकी सुनवाई भी इसी जनहित याचिका के साथ की जाएगी।


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