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एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने सोमवार को 1857 की क्रांति में योगदान के लिए जाने जाने वाले मौलवी अलाउद्दीन का ज़िक्र करते हुए सावरकर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने के विचार की आलोचना की .
उन्होंने कहा, ''मौलवी अलाउद्दीन, हैदराबाद की मक्का मस्जिद के इमाम थे. उन्होंने अंग्रेजों का उस समय विरोध किया था, जब औरंगाबाद में कुछ स्वतंत्रता सेनानियों को पकड़ा गया था. वो भी उस दौर में जब यहां निज़ाम का शासन था, जिन्हें अंग्रेजों का संरक्षण प्राप्त था."
"मौलवी अलाउद्दीन पर हमला किया गया, लेकिन वह बच निकले. बाद में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया. वह ‘काला पानी’ (अंडमान की सेल्युलर जेल) भेजे जाने वाले पहले कैदी थे. मौलाना अलाउद्दीन की वहीं जेल में मृत्यु हो गई. भारत रत्न तो ऐसे लोगों को मिलना चाहिए. ”
ओवैसी ने कहा, ''आज आरएसएस उस शख़्स को भारत रत्न देने की मांग कर रही है जिन्होंने अंग्रेजों को छह माफ़ीनामे लिखे. एक समय ऐसा भी आएगा जब बीजेपी नाथूराम गोडसे को भारत रत्न दे देगी.''
ओवैसी की ये प्रतिक्रिया आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की ओर से सावरकर को भारत देने की मांग के बाद आई है.
मोहन भागवत ने आरएसएस के 100 पूरे होने पर आयोजित दो दिवसीय व्याख्यानमाला में कहा था, ''अगर सावरकर को भारत रत्न दिया जाता है तो भारत रत्न का सम्मान और बढ़ेगा.''
उन्होंने कहा था कि वो भारत रत्न का चयन करने वाली कमेटी में नहीं हैं लेकिन मौका मिला तो वे ये मुद्दा उठाएंगे. (bbc.com/hindi)


