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-आसिफ़ अली
अंकिता भंडारी हत्याकांड में 'अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच' के आह्वान पर रविवार को देहरादून में एक महापंचायत आयोजित की गई. इस महापंचायत में कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) समेत 40 से अधिक सामाजिक, कर्मचारी और जन संगठन शामिल हुए.
आयोजकों का कहना था कि भले ही मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई हो, लेकिन अब भी कई अहम सवालों के जवाब नहीं मिले हैं.
इस महापंचायत में अंकिता भंडारी के माता-पिता भी पहुंचे थे. इस दौरान अंकिता के माता-पिता की ओर से सीएम को सौंपे गए सीबीआई जांच पत्र को ही शिकायती पत्र मानने, डॉक्टर अनिल प्रकाश जोशी की एफ़आईआर ख़ारिज करने जैसे प्रस्ताव पेश किए गए, जो सर्वसम्मति से पास हुए.
अंकिता के पिता ने कहा, “मुझे यहां इसलिए आना पड़ा क्योंकि बहुत से लोगों में भ्रम था कि अंकिता के माता-पिता बिक चुके हैं, लेकिन मैं न समझौता करने वालों में हूं, न बिकने वालों में.”
उन्होंने आगे कहा, “बच्ची वीआईपी के आगे झुकी नहीं, तो भला मैं कैसे झुक सकता हूं. मैंने मुख्यमंत्री को प्रस्ताव बनाकर भेजा है कि सीबीआई की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में हो.”
“अनिल प्रकाश जोशी ने हमारी तरफ़ से एफ़आईआर क्यों की? मैंने उन्हें नहीं जानता. अगर कार्रवाई होगी तो मेरी एफ़आईआर पर होगी.”
उत्तराखंड महिला मंच की संयोजक कमला पंत ने कहा, “जब वीआईपी कहे जाने वाले दो लोगों के नाम संदेह के घेरे में आ चुके हैं, तो उन्हें अब तक जांच के दायरे में क्यों नहीं लाया गया.”
भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने बीबीसी हिंदी से कहा कि 'आज की महापंचायत, अंकिता भंडारी मामले से जुड़े आंदोलन का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है.'
उन्होंने कहा, “सीबीआई जांच की घोषणा के बाद भी आंदोलन से जुड़े लोगों को संदेह है कि सरकार वीआईपी लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है.”
मैखुरी के अनुसार, “यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक वीआईपी लोगों को सज़ा नहीं हो जाती.” (bbc.com/hindi)


