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फ़िल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर विवाद: यूपी में एफआईआर, निर्देशक ने माफ़ी मांगी; नेटफ्लिक्स ने हटाया टीज़र
07-Feb-2026 11:51 AM
फ़िल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर विवाद: यूपी में एफआईआर, निर्देशक ने माफ़ी मांगी; नेटफ्लिक्स ने हटाया टीज़र

नई दिल्ली / लखनऊ, 7 फरवरी। नेटफ्लिक्स पर आने वाली निर्देशक नीरज पांडे की फ़िल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर उठा विवाद अब क़ानूनी कार्रवाई तक पहुँच गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ की हज़रतगंज कोतवाली में फ़िल्म के निर्देशक और उनकी टीम के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके बाद नेटफ्लिक्स ने फ़िल्म से जुड़ी सभी प्रचार सामग्री, जिसमें टीज़र और फर्स्ट-लुक शामिल हैं, अपने प्लेटफ़ॉर्म से हटा ली है।

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि फ़िल्म के शीर्षक और कथित सामग्री से एक विशेष समुदाय को अपमानित करने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और शांति भंग करने की आशंका पैदा हुई है। पुलिस के अनुसार, फ़िल्म के नाम को लेकर ब्राह्मण समाज और कई सामाजिक संगठनों में गहरा रोष है और विरोध प्रदर्शन की चेतावनियाँ भी दी गई थीं।

इससे पहले फ़िल्म निर्माता संगठन फ़िल्म मेकर्स कंबाइन की ओर से भी नोटिस जारी किया गया था। वहीं, अधिवक्ता विनीत जिंदल ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर फ़िल्म की रिलीज़ पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि ‘घूसखोर पंडत’ शीर्षक जानबूझकर ब्राह्मण समुदाय की गरिमा और भावनाओं को ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से चुना गया है।

निर्देशक नीरज पांडे ने मांगी माफ़ी
विवाद बढ़ने के बाद निर्देशक नीरज पांडे ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचने के लिए माफ़ी मांगी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फ़िल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और ‘पंडित’ शब्द का इस्तेमाल किसी समुदाय के लिए नहीं, बल्कि एक काल्पनिक किरदार के उपनाम के रूप में किया गया है।

नीरज पांडे ने कहा कि फ़िल्म किसी जाति, धर्म या समुदाय पर टिप्पणी नहीं करती, बल्कि एक व्यक्ति के कर्मों और उसके जीवन की यात्रा पर केंद्रित है। उन्होंने यह भी बताया कि विवाद को देखते हुए फ़िल्म से जुड़ी सभी प्रचार सामग्री हटा ली गई है।

मनोज बाजपेयी की प्रतिक्रिया
फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे अभिनेता मनोज बाजपेयी ने भी बयान जारी कर कहा कि एक अभिनेता के तौर पर वह किसी फ़िल्म में अपने किरदार और कहानी के माध्यम से जुड़ते हैं। उनके मुताबिक, यह भूमिका एक कमजोर इंसान और उसके आत्मबोध की कहानी है, न कि किसी समुदाय पर टिप्पणी। उन्होंने कहा कि फ़िल्म निर्माताओं द्वारा प्रचार सामग्री हटाने का फैसला दर्शाता है कि लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लिया गया है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी तेज़
इस मामले में राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने केंद्र सरकार से फ़िल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि फ़िल्मों के ज़रिये एक समुदाय को अपमानित करना बेहद चिंताजनक है और इससे समाज में ग़ुस्सा फैल रहा है।

वहीं, केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि रचनात्मकता के नाम पर किसी समाज को बदनाम करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। इससे पहले विश्व हिंदू परिषद ने भी नेटफ्लिक्स को पत्र लिखकर फ़िल्म के शीर्षक पर आपत्ति जताई थी और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से कार्रवाई की मांग की थी।

फिलहाल, नेटफ्लिक्स की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन प्लेटफ़ॉर्म से फ़िल्म से जुड़ी सभी प्रचार सामग्री हटा ली गई है।

स्रोत
हिंदुस्तान टाइम्स, एनडीटीवी, इंडिया टुडे, दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका से जुड़े दस्तावेज़, लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट का प्रेस नोट, सोशल मीडिया पर जारी बयान


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