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अशोक तिवारी को नेशनल टैगोर फैलोशिप
06-Feb-2026 2:49 PM
अशोक तिवारी को नेशनल टैगोर फैलोशिप

छत्तीसगढ़ संवाददाता 
रायपुर ,6 फरवरी
।वरिष्ठ संस्कृति एवं संग्रहालय विशेषज्ञ अशोक तिवारी को भारत सरकार की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय टैगोर शोधवृत्ति के लिए चयनित किया गया है। उन्हें यह शोधवृत्ति छत्तीसगढ़ की लोक एवं जनजातीय चित्रकला और मूर्तिकला पर गहन अध्ययन के लिए प्रदान की जा रही है। 
श्री तिवारी के शोध का विषय है—
“Sacred and Decorative: Painted and Sculpted Folk and Tribal Arts of Chhattisgarh”।

फेलोशिप की अवधि दो वर्ष निर्धारित की गई है।
उल्लेखनीय है कि टैगोर फेलोशिप सांस्कृतिक अनुसंधान के क्षेत्र में देश की सबसे प्रतिष्ठित शोधवृत्तियों में से एक है। अशोक तिवारी छत्तीसगढ़ से इस फेलोशिप के लिए चयनित होने वाले पहले शोधार्थी हैं, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है।

ज्ञातव्य है कि अशोक तिवारी पिछले पाँच दशकों से अधिक समय से संस्कृति के विविध क्षेत्रों में सक्रिय हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल में लगभग तीन दशकों तक कार्य करते हुए इस राष्ट्रीय संस्थान के निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

छत्तीसगढ़ में पारंपरिक खानपान केंद्र गढ़कलेवा की परिकल्पना एवं निर्माण के वे प्रमुख क्यूरेटर रहे हैं। इसके साथ ही रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में निर्मित प्रथम मुक्ताकाश प्रदर्शनी ‘आमचो बस्तर’ का क्यूरेशन भी उनके द्वारा किया गया।

पिछले लगभग आठ वर्षों से वे देश के विभिन्न राज्यों तथा विदेशों में निवासरत प्रवासी छत्तीसगढ़िया समाज पर निरंतर शोध कर रहे हैं। इस विषय पर उनकी अब तक चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में वे सी. वी. रमन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

राष्ट्रीय टैगोर शोधवृत्ति के लिए उनका चयन छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और अकादमिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।


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