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दहेज प्रताड़ना का झूठा केस करना मानसिक क्रूरता
06-Feb-2026 11:38 AM
दहेज प्रताड़ना का झूठा केस करना मानसिक क्रूरता

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला पलटा, पति को तलाक की अनुमति दी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 6 फरवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि पति और उसके परिजनों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का झूठा आपराधिक मामला दर्ज कराना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। इस आधार पर अदालत ने धमतरी फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए पति की तलाक याचिका स्वीकार कर ली।

धमतरी निवासी धर्मेंद्र साहू का विवाह 28 अप्रैल 2009 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संध्या साहू से हुआ था। विवाह के बाद दंपती को दो पुत्रियां हुईं। हालांकि, दाम्पत्य जीवन के कुछ वर्षों बाद संबंधों में तनाव बढ़ गया।

10 अप्रैल 2017 को पत्नी ने पति, देवर और सास के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया। इसके बाद वह मायके चली गई और फिर वापस नहीं लौटी। इस आपराधिक मामले में पति और उसके परिवार को करीब पांच वर्षों तक अदालती कार्यवाही का सामना करना पड़ा। लंबी सुनवाई के बाद वर्ष 2022 में धमतरी की अदालत ने पत्नी के आरोपों को प्रमाणित न मानते हुए पति और उसके परिजनों को बरी कर दिया। इसके पश्चात पति ने फैमिली कोर्ट में मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर की, जिसे 17 अगस्त 2023 को खारिज कर दिया गया था।

अपील की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की खंडपीठ ने की, जिसमें न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा शामिल थे। खंडपीठ ने कहा कि झूठे आरोपों के कारण पति और उसके बुजुर्ग परिजनों को वर्षों तक गिरफ्तारी का भय, सामाजिक अपमान और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी, जिसे किसी भी स्थिति में सामान्य नहीं माना जा सकता।

अदालत ने कहा कि जब कोई व्यक्ति झूठे आरोपों के चलते लंबे समय तक आपराधिक मुकदमे का सामना करता है और अंततः बरी होता है, तो यह मानना गलत होगा कि उसे मानसिक क्रूरता नहीं हुई। इस आधार पर वर्ष 2009 में हुआ विवाह समाप्त करने का आदेश दिया गया। हालांकि हाईकोर्ट ने पत्नी को भविष्य में स्थायी गुजारा भत्ते के लिए अलग से आवेदन करने की स्वतंत्रता भी प्रदान की है।


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