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हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश बरकरार रखा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 6 फरवरी। यदि पत्नी बिना किसी ठोस और पर्याप्त कारण के पति और ससुराल से अलग रहना चुनती है, तो उसे मासिक भरण-पोषण का अधिकार नहीं मिलेगा। यह मानते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि फैमिली कोर्ट के आदेश का अवलोकन करने पर उसमें कोई ऐसी कानूनी त्रुटि या दोष नजर नहीं आता, जिसके लिए हाईकोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो।
अदालत ने पाया कि पति द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत दांपत्य अधिकारों की बहाली के लिए याचिका दायर की गई थी। ऐसे में पत्नी के पास यह अवसर था कि वह वापस लौटकर वैवाहिक जीवन पुनः शुरू करे। इस स्थिति में अलग रहकर भरण-पोषण की मांग करना कानूनन उचित नहीं माना जा सकता।
दरअसल, बिलासपुर निवासी प्रवीण कुमार वेदुला का विवाह 10 फरवरी 2019 को छाबड़ा पैलेस, बिलासपुर में भानु अलिगी से हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद 19 अक्टूबर 2020 को पत्नी ने महिला थाना, बिलासपुर में पति और उसके परिजनों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई।
पत्नी का आरोप था कि विवाह के चार दिन बाद ही उससे कार और 10 लाख रुपये की मांग की गई तथा मानसिक, शारीरिक और मौखिक प्रताड़ना की गई। पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने पर उसने 24 नवंबर 2020 को जेएमएफसी न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। सुनवाई के बाद 19 मार्च 2021 को न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर के समक्ष दायर पुनरीक्षण याचिका भी निरस्त हो गई।
फैमिली कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125(4) के अनुसार यदि पत्नी बिना पर्याप्त कारण के पति से अलग रहती है, तो वह भरण-पोषण की हकदार नहीं होती। हाईकोर्ट ने इस व्याख्या को पूरी तरह सही माना।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट का निर्णय विधिसम्मत है और उसमें किसी प्रकार की अवैधता या त्रुटि नहीं है। इसी आधार पर पत्नी की याचिका खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश की पुष्टि कर दी गई।


