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सीजीएमएससी ने गलत ई-मेल भेजकर ठेके से बाहर किया, एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति का आदेश
06-Feb-2026 11:41 AM
सीजीएमएससी ने गलत ई-मेल भेजकर ठेके से बाहर किया, एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति का आदेश

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 6 फरवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के मनमाने और असंवैधानिक रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए उस पर एक लाख रुपये की कॉस्ट लगाई है। यह राशि याचिकाकर्ता के खाते में जमा कराई जाएगी। फैसले में अदालत ने कहा कि सार्वजनिक निविदा प्रक्रिया में समान अवसर के सिद्धांत को कुचलना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की खंडपीठ में हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र अग्रवाल शामिल थे। अदालत ने पाया कि सीजीएमएससी ने याचिकाकर्ता को स्पष्टीकरण से जुड़ा अहम ई-मेल गलत और असंबंधित ई-मेल आईडी पर भेज दिया। इसी आधार पर उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया, जबकि यह प्रक्रिया ही त्रुटिपूर्ण और अवैध थी।

रायगढ़ निवासी नटवर लाल अग्रवाल ने जशपुर जिले के पत्थलगांव क्षेत्र स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोटबा के भवन एवं अस्पताल निर्माण के लिए लगभग 4 करोड़ रुपये की निविदा में भाग लिया था। याचिकाकर्ता ने सबसे कम बोली प्रस्तुत की थी, जो शासन के लिए अधिक लाभकारी थी। इसके बावजूद उसकी वित्तीय निविदा खोली तक नहीं गई और ठेका किसी अन्य बोलीदाता हितेन सूर्यवंशी को दे दिया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा ने अदालत को बताया कि जिन दस्तावेजों के आधार पर रायगढ़ में 100 बिस्तर वाले अस्पताल का ठेका याचिकाकर्ता को दिया गया था, उन्हीं दस्तावेजों को कोटबा परियोजना में सीजीएमएससी ने नजरअंदाज कर दिया। अदालत ने इस दोहरे मापदंड को गंभीर माना।

खंडपीठ ने टिप्पणी की कि सीजीएमएससी का यह आचरण न केवल मनमाना है, बल्कि सार्वजनिक निविदा प्रक्रिया में समान अवसर के सिद्धांत को भी समाप्त करता है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।

हालांकि अदालत ने जनहित को ध्यान में रखते हुए अस्पताल परियोजना को आगे जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन सीजीएमएससी की मनमानी मानते  हुए उसे याचिकाकर्ता को एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया।


 


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