ताजा खबर

गंदे हाथ लेकर आने पर अदालत से न्याय नहीं मिलेगा
06-Feb-2026 11:36 AM
गंदे हाथ लेकर आने पर अदालत से न्याय नहीं मिलेगा

हाईकोर्ट ने विचारण न्यायालय का फैसला पलटा

बेटे के मेडिकल एडमिशन के लिए डॉक्टर ने दिए थे 56 लाख रुपये  

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 6 फरवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति किसी अवैध कार्य या सार्वजनिक नीति के विरुद्ध समझौते के तहत धनराशि का लेन-देन करता है, तो बाद में वह उस रकम की वसूली के लिए अदालत की शरण नहीं ले सकता। अदालत ने इसी आधार पर बिलासपुर की निचली अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें एक डॉक्टर के पक्ष में 56 लाख रुपये लौटाने का निर्देश दिया गया था।

मामले के अनुसार, बिलासपुर निवासी डॉ. के.के. अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि मनेंद्रगढ़ निवासी नयन दत्ता ने स्वयं को मुख्यमंत्री का करीबी बताते हुए उनके बेटे का कोलकाता के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में पीजी में दाखिला कराने का भरोसा दिया। इस कथित आश्वासन के तहत दोनों के बीच बड़ी राशि का लेन-देन हुआ।

जब बेटे का पीजी में प्रवेश नहीं हो सका, तो डॉ. अग्रवाल ने बिलासपुर की अदालत में सिविल सूट दायर किया। निचली अदालत ने 20 अक्टूबर 2023 को नयन दत्ता को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 56 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया था।

इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील की गई। मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में हुई, जिसमें न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल और न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद शामिल थे। बेंच ने कहा कि पूरा लेन-देन एक अवैध उद्देश्य पर आधारित था।

अदालत ने माना कि डॉक्टर और नयन दत्ता, दोनों इस तथ्य से भली-भांति अवगत थे कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में इस प्रकार से प्रवेश कराना कानूनन संभव नहीं है। इसलिए दोनों ही पक्ष समान रूप से दोषी हैं और ऐसी स्थिति में किसी एक को कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अदालतें उन लोगों की मदद नहीं करतीं, जो गंदे हाथों के साथ न्याय मांगने आते हैं। जब धन देने वाले को स्वयं यह जानकारी थी कि उद्देश्य अवैध है, तो वह भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 65 के तहत भी धन वापसी का दावा नहीं कर सकता।

इन सभी कारणों के आधार पर हाईकोर्ट ने बिलासपुर की निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया और स्पष्ट किया कि अवैध सौदे से जुड़ी रकम की वसूली के लिए न्यायिक सहायता नहीं दी जा सकती।


अन्य पोस्ट