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कांग्रेस का कटाक्ष : संसद ‘मन की बात’ के लिए नहीं है
05-Feb-2026 12:29 PM
कांग्रेस का कटाक्ष : संसद ‘मन की बात’ के लिए नहीं है

नयी दिल्ली, 5 फरवरी। कांग्रेस ने संसद में जारी गतिरोध के बीच बृहस्पतिवार को सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह ‘मन की बात’ वाली सोच से सदन चलाना चाहती है, लेकिन सदन ‘मन की बात’ के लिए नहीं, बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की आवाज सुनने के लिए है।

मुख्य विपक्षी दल ने इस बात पर भी जोर दिया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं को भी बोलने का मौका मिलना चाहिए।

लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक और वर्तमान बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित सांसद मणिकम टैगोर ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘सदन में दो आवाजें हैं, एक आवाज सत्तापक्ष की और दूसरी विपक्ष की है। लेकिन विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास हो रहा है। सरकार नहीं चाहती कि विपक्ष की आवाज को मौका मिले।’’

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘यह सरकार की ‘मन की बात’ वाली सोच है। ‘मन की बात’ रेडियो पर हो सकती है, लेकिन संसद ‘मन की बात’ के लिए नहीं है। संसद में विपक्ष के नेता बोलते हैं और फिर प्रधानमंत्री जवाब दे सकते हैं।’’

टैगोर ने कहा कि यह पहली बार है कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने का मौका नहीं दिया गया और संभवत: प्रधानमंत्री भी नहीं बोलेंगे, जो लोकतंत्र के लिए दुखद है।

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘संसदीय लोकतंत्र में नेता प्रतिपक्ष तथा दूसरे नेताओं को भी सदन में बोलने का अधिकार है, लेकिन इस सरकार द्वारा उन्हें बोलने से वंचित किया जा रहा है। इसलिए हमारा एकमात्र एजेंडा है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में विपक्षी नेताओं और नेता प्रतिपक्ष को बोलने का मौका मिलना चाहिए।’’

उधर, विपक्षी दलों के नेताओं ने बृहस्पतिवार को बैठक कर संसद के वर्तमान बजट सत्र में आगे की रणनीति पर चर्चा की और फैसला किया कि वे विपक्षी नेताओं को सदन में नहीं बोलने देने के विषय पर सरकार को घेरेंगे।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संसद भवन स्थित कक्ष में हुई बैठक में कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और कई अन्य दलों के नेता शामिल हुए। (भाषा)


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