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900 डिग्री गर्म राख ने छीनी 6 जिंदगियां, मृतक परिवार को 45 लाख मुआवजा, भट्टी सील
23-Jan-2026 1:47 PM
900 डिग्री गर्म राख ने छीनी 6 जिंदगियां, मृतक परिवार को 45 लाख मुआवजा, भट्टी सील

 'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बलौदाबाजार, 23 जनवरी।
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के अंतर्गत ग्राम बकुलाही स्थित मेसर्स रियल इस्पात एण्ड एनर्जी प्रा. लि. के कारखाना परिसर में घटित भीषण औद्योगिक दुर्घटना के मामले में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर सख्त कदम उठाया गया है। दुर्घटना की प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर कारखाना अधिनियम के तहत किल्न क्रमांक-01 के संचालन एवं मेंटेनेंस सहित समस्त कार्यों पर तत्काल प्रतिबंध लगाए जाने का आदेश जारी किया गया है।
वहीं कंपनी प्रबंधन के अनुसार मृतकों के परिजनों को प्रति परिवार कुल 45 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इसमें 20 लाख रुपये का चेक तत्काल और 25 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा शामिल है।

ज्ञात हो कि गुरुवार को बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र के ग्राम बकुलाही स्थित रियल इस्पात एंड एनर्जी प्लांट में कोयला भ_े के पास हुए विस्फोट में छह मजदूरों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का उपचार बिलासपुर स्थित बर्न ट्रीटमेंट सेंटर में जारी है।
घटना की सूचना मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शोक व्यक्त करते हुए जांच के निर्देश दिए। कलेक्टर दीपक सोनी और पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। प्रशासन द्वारा संयंत्र क्षेत्र को सील कर दिया गया है और एसडीएम के निर्देशन में जांच प्रारंभ की गई है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय संयंत्र में लगभग 50 कर्मचारी कार्यरत थे। अचानक डस्ट सेटलिंग चेंबर से गर्म राख बाहर निकल आई। संयंत्र के अन्य हिस्सों में कार्यरत कर्मचारी बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि डीएससी और मेट स्क्रबर के पास काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। बताया गया कि राख का तापमान

लगभग 850 से 900 डिग्री सेल्सियस था।
घायलों को पहले भाटापारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बिलासपुर रेफर किया गया।
कंपनी के एचआर हेड राजेश कुमार सिंह ने बताया कि मृतक और घायल मजदूर बिहार और झारखंड के निवासी थे। वे 8 जनवरी को काम की तलाश में बलौदाबाजार आए थे और 9 जनवरी से संयंत्र में कार्यरत थे। उन्होंने बताया कि सभी मजदूर आपस में पारिवारिक संबंध में थे और घटना की जानकारी उनके परिजनों को दे दी गई है।
 

मुआवजे की घोषणा
कंपनी प्रबंधन के अनुसार मृतकों के परिजनों को प्रति परिवार कुल 45 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इसमें 20 लाख रुपये का चेक तत्काल और 25 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा शामिल है। अंतिम संस्कार के लिए 25-25 हजार रुपये की सहायता भी दी गई है। घायलों के इलाज का पूरा खर्च कंपनी द्वारा वहन किया जा रहा है और उन्हें 5-5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।

भट्टी क्रमांक-01 सील
मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रारंभिक जांच के बाद कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के तहत किल्न क्रमांक-01 के संचालन और मेंटेनेंस कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है। सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, बलौदाबाजार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों के पालन में कमी पाई गई।

जांच के अनुसार भ_ी का शटडाउन किए बिना कार्य कराया जा रहा था और श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण तथा प्रशिक्षण उपलब्ध नहीं कराया गया था। प्रतिबंध तब तक प्रभावशील रहेगा, जब तक प्रबंधन सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित कर प्रमाण प्रस्तुत नहीं करता। आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान श्रमिकों को वेतन और अन्य देयकों का भुगतान किया जाएगा।

 कांग्रेस ने बनाई जांच समिति
घटना की जांच के लिए कांग्रेस पार्टी ने भी एक समिति गठित की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर बनाई गई समिति के संयोजक पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू हैं। समिति में भाटापारा विधायक इंद्र साव, कसडोल विधायक संदीप साहू सहित अन्य सदस्य शामिल हैं।

प्रशासनिक और विभागीय जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे के कारणों और जिम्मेदारियों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कार्यालय सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा जारी आदेश के अनुसार  22 जनवरी 2026 को प्रात: लगभग 9.40 बजे किल्न क्रमांक-01 के डस्ट सेटलिंग चेंबर के द्वितीय तल में कार्य के दौरान अचानक विस्फोट एवं गर्म ऐश की बौछार होने से 6 श्रमिकों की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जब कि 5 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के समय डस्ट सेटलिंग चेंबर के भीतर लगभग 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्म ऐश को पोकिंग के माध्यम से नीचे गिराया जा रहा था।

घटना की गंभीरता को देखते हुए सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, बलौदाबाजार द्वारा उप संचालकों एवं अधिकारियों की संयुक्त टीम के साथ कारखाने का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दुर्घटनास्थल की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी की गई ।इस दौरान कारखाना प्रबंधन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कारखाना प्रबंधन द्वारा  एसओपी का पालन नहीं किया गया। किल्न का शटडाउन किए बिना श्रमिकों से अत्यंत जोखिमपूर्ण स्थिति में कार्य कराया गया।

डस्ट सेटलिंग चेंबर के हाईड्रोलिक स्लाइड गेट को बंद नहीं किया गया, उचित वर्क परमिट जारी नहीं किया गया, नियमित रखरखाव का अभाव रहा तथा श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण और हीट रेसिस्टेंट एप्रन, सुरक्षा जूते, हेलमेट जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए।

 किल्न क्रमांक-01 में विनिर्माण प्रक्रिया एवं मेंटेनेंस कार्य इमिनेंट डेंजर की स्थिति में थे। जिसके चलते कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के अंतर्गत किल्न क्रमांक-01 के संचालन एवं समस्त मेंटेनेंस कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध तब तक प्रभावशील रहेगा, जब तक कारखाना प्रबंधन द्वारा सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंधात्मक अवधि के दौरान कारखाने में नियोजित समस्त श्रमिकों को देय वेतन एवं अन्य भत्तों का भुगतान निर्धारित तिथि में अनिवार्य रूप से किया जाए।

सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का कहना है कि  औद्योगिक प्रतिष्ठानों में श्रमिकों की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।—


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