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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
कुरूद, 23 जनवरी। बस्तर के बाद अब धमतरी जिले में भी नक्सलियों के आत्मसमर्पण होने लगे हंै। आज नक्सल विरोधी अभियान के तहत 47 लाख रुपये के इनामी 9 हार्डकोर नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष अपने हथियार डाल समाज के मुख्य धारा में लौटने का निर्णय लिया है। यह आत्मसमर्पण प्रतिबंधित नक्सली संगठन की उड़ीसा राज्य कमेटी के अंतर्गत सक्रिय नगरी एरिया कमेटी, सीतानदी एरिया कमेटी, मैनपुर एलओएस एवं गोबरा एलओएस से जुड़े नक्सलियों द्वारा किया गया है।
समाज में लंबे समय से हिंसा, डर और विनाश फैलाने वाले इन नक्सलियों ने शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक यह घटना जिले ही नहीं बल्कि पूरे बस्तर और गरियाबंद-धमतरी सीमा क्षेत्र में नक्सलवाद के कमजोर पडऩे का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।
रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा, एसपी सूरज सिंह परिहार समेत अन्य अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 47 लाख के इनामी नक्सली शामिल है। जिसमें ज्योति उर्फ जैनी उर्फ रेखा (8 लाख की इनामी),उषा उर्फ बालम्मा (8 लाख), रामदास मरकाम उर्फ आयता उर्फ हिमांशु (5 लाख), रोनी उर्फ उमा (5 लाख), निरंजन उर्फ पोडिय़ा (5 लाख), सिंधु उर्फ सोमड़ी (5 लाख), रीना उर्फ चिरो (5 लाख), वेमिला उर्फ सन्नी (5 लाख) तथा लक्ष्मी पुनेम उर्फ आरती (1 लाख) शामिल हैं। ये सभी अलग-अलग एरिया कमेटियों में सक्रिय रहकर वर्षों से नक्सली गतिविधियों में शामिल थे।
हथियारों का जखीरा सौंपा
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष 5 ऑटोमेटिक हथियार, 1 भरमार बंदूक, एसएलआर रायफल, कार्बाइन, मैगजीन, सैकड़ों कारतूस, वॉकी-टॉकी सेट एवं अन्य नक्सली सामग्री जमा कराई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह हथियार लंबे समय तक सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के लिए खतरा बने हुए थे।
पुलिस दबाव और जनसंपर्क अभियान का असर
धमतरी पुलिस, डीआरजी, एसटीएफ, सीआरपीएफ एवं अन्य केंद्रीय बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों, जंगल क्षेत्रों में सघन सर्च ऑपरेशन, साथ ही ग्रामीण अंचलों में चलाए गए पोस्टर-पंपलेट अभियान, बैनर, जनजागरूकता और संवाद कार्यक्रमों का सीधा असर देखने को मिला है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नक्सलियों के अनुभव, शासन की पुनर्वास योजनाओं से मिले लाभ और सुरक्षित जीवन की तस्वीर ने इन नक्सलियों को सोचने पर मजबूर किया। नक्सली विचारधारा की खोखलापन, जंगलों में कठिन जीवन और लगातार दबाव के चलते उन्होंने हिंसा का रास्ता छोडऩे का निर्णय लिया।
पुनर्वास नीति से मिलेगा नया जीवन
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को शासन की नीति के तहत घोषित इनाम राशि, आवास सुविधा, स्वास्थ्य उपचार,
रोजगार एवं कौशल विकास, सामाजिक पुनर्वास जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। पुलिस का कहना है कि कई पूर्व नक्सली पहले ही सामान्य नागरिक की तरह सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं, जिससे अन्य नक्सलियों को भी सकारात्मक संदेश मिल रहा है। नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता धमतरी पुलिस प्रशासन ने इस आत्मसमर्पण को नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी रणनीतिक जीत बताया है।
अधिकारियों ने कहा कि आने वाले समय में भी नक्सलियों को हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लाने के प्रयास तेज किए जाएंगे। यह आत्मसमर्पण स्पष्ट करता है कि धमतरी और आसपास के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब शांति, विकास और विश्वास का माहौल बन रहा है, और नक्सलवाद धीरे-धीरे अपने अंतिम दौर की ओर बढ़ रहा है।



