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आजीवन कारावास का दंड बदलकर दोषियों की रिहाई का आदेश
23-Jan-2026 12:04 PM
आजीवन कारावास का दंड बदलकर दोषियों की रिहाई का आदेश

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 23 जनवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हत्या के आरोप को गैर-इरादतन हत्या में परिवर्तित करते हुए आजीवन कारावास की सजा से आरोपियों को राहत दी है।

मामले के अनुसार 15 मई 2014 को सक्ती थाना क्षेत्र में शादी समारोह के लिए लकड़ी काटते समय आरोपियों सुकुल और उमाशंकर का मृतक छोटेलाल से मामूली विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने हाथ, मुक्कों और लातों से मारपीट की। गंभीर चोटों के कारण अगले दिन छोटेलाल की मौत हो गई।

सत्र न्यायालय, सक्ती ने वर्ष 2016 में दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने गवाहों के बयान और चिकित्सकीय साक्ष्यों का परीक्षण किया। अदालत ने माना कि घटना अचानक हुई, इसमें पूर्व नियोजन या हत्या का स्पष्ट इरादा नहीं था। हमला किसी घातक हथियार से नहीं, बल्कि हाथ-मुक्कों और लातों से किया गया था। ऐसे में आरोपियों को केवल इतना ज्ञान था कि चोटें घातक हो सकती हैं।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अर्जुन बनाम छत्तीसगढ़ राज्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मामला हत्या नहीं, बल्कि भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग-दो के अंतर्गत आता है।

हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि आरोपी 5 वर्ष 6 माह से अधिक समय जेल में काट चुके हैं, सजा की अवधि को पर्याप्त मानते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया।


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