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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 23 जनवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने विस्तृत शपथपत्र पेश कर बताया कि बाघ और तेंदुओं की मौत के बाद पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर एंटी-पोचिंग अभियान चलाया जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सरकार की कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि आगे बाघों की मौत केवल प्राकृतिक कारणों से ही होगी। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को तय की गई है।
वन विभाग ने अपने जवाब में बताया कि बिलासपुर वन मंडल में संवेदनशील इलाकों की निगरानी तेज कर दी गई है। यहां नियमित एंटी-स्नेयर वॉक, बिजली विभाग के साथ संयुक्त निरीक्षण, 11 केवी और 33 केवी लाइनों की जांच और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने अपने व्यक्तिगत शपथपत्र में कहा है कि दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच प्रदेशभर में 5726 किलोमीटर वन क्षेत्र में पैदल गश्त की गई। इस दौरान जीवित तार, अवैध फंदे, बिजली हुकिंग उपकरण, देशी हथियार और अन्य सामग्री जब्त की गई।
दुर्ग सर्कल के सौरागढ़ में तेंदुए की करंट से मौत के मामले में सात आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और एक बीट गार्ड को निलंबित किया गया। सूरजपुर के सुरगुजा सर्कल में बाघ की मौत के बाद सूंघने वाले कुत्तों की मदद से आरोपियों को पकड़ा गया। बलरामपुर में 70 मीटर से अधिक तार जब्त किए गए। नक्सल प्रभावित बस्तर के इंद्रावती क्षेत्र में सीआरपीएफ के साथ संयुक्त अभियान भी चलाया गया।
इसके अलावा 14 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट के निर्देश पर वन विभाग, बिजली वितरण कंपनी और पुलिस विभाग की संयुक्त उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। सरकार ने बताया कि अब संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, लापरवाही पर विभागीय कार्रवाई और मुखबिरों के लिए गुप्त इनाम जैसी व्यवस्थाएं लागू कर दी गई हैं।
गौरतलब है कि लगातार वन्यजीवों के शिकार और मौतों को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। एक माह पहले सूरजपुर के घुई वन परिक्षेत्र में बाघ की करंट से मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम में करंट से मौत की पुष्टि हुई थी और जांच में बाघ के नाखून व दांत गायब पाए गए थे। इससे पहले खैरागढ़-डोंगरगढ़ के बीच बनबोद वन गांव में एक वयस्क तेंदुए की भी बेरहमी से हत्या हुई थी।


