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न्यायालय ने बसंत पंचमी पर भोजशाला में हिंदुओं को दी पूजा की अनुमति; मुस्लिम को नमाज की इजाजत
22-Jan-2026 8:57 PM
न्यायालय ने बसंत पंचमी पर भोजशाला में हिंदुओं को दी पूजा की अनुमति; मुस्लिम को नमाज की इजाजत

नयी दिल्ली, 22 जनवरी। उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद स्थल पर बसंत पंचमी के दिन शुक्रवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने, जबकि मुसलमानों को अपराह्न एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति दी है।

न्यायालय ने बृहस्पतिवार को यह भी निर्देश दिया कि नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की सूची जिला प्रशासन को दी जाए।

हिंदू और मुस्लिम समूहों ने 23 जनवरी शुक्रवार को भोजशाला परिसर में धार्मिक रस्मों के लिए अनुमति मांगी थी। उस दिन बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजा भी है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने दोनों पक्षों से परस्पर सम्मान और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य और जिला प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की।

पीठ ने कहा, ‘‘एएसजी (अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल) और महाधिवक्ता, दोनों ने उचित सुझाव दिया है कि यह जानने के बाद कि कल (शुक्रवार) दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए मुस्लिम समुदाय से कितने लोगों के आने की संभावना है, परिसर के भीतर एक विशेष और अलग स्थान उपलब्ध कराया जाए, ताकि निर्धारित समय पर नमाज अदा की जा सके।’’

न्यायालय ने कहा, ‘‘इसी प्रकार, पहले की तरह, बसंत पंचमी के अवसर पर पारंपरिक अनुष्ठान के लिए हिंदू समुदाय को एक अलग स्थान उपलब्ध कराया जाए।’’

पीठ ने जिला प्रशासन को उस स्थान पर कानून व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन आगंतुकों के लिए निशुल्क उपयुक्त पास जारी कर सकता है या किसी भी अप्रिय घटना को टालने और अनुष्ठानों/रस्मों को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए अन्य उचित उपाय कर सकता है।’’

हिंदू समुदाय, भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित 11वीं शताब्दी का स्मारक है।

एएसआई द्वारा सात अप्रैल 2003 को की गई एक व्यवस्था के तहत, हिंदू समुदाय के सदस्य मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना करते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय के सदस्य शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करते हैं।

न्यायालय ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा। याचिका में, बसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने का विशेष अधिकार देने का अनुरोध किया गया था।

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के मार्फत दायर याचिका पर मंगलवार को तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया गया था।

जैन ने कहा था कि एएसआई के 2003 के आदेश में शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी पड़ने से उत्पन्न होने वाली स्थिति का समाधान नहीं किया गया है। उन्होंने बसंत पंचमी के अवसर पर पूरे दिन हिंदुओं के लिए विशेष, निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

सुनवाई के दौरान, जैन ने दलील दी कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा और हवन होंगे और उन्होंने पूरे दिन पूजा करने की अनुमति देने का अनुरोध किया।

वहीं, मस्जिद समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने दलील दी कि शुक्रवार की नमाज दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच होती है और उसके बाद परिसर खाली किया जा सकता है।

खुर्शीद ने यह भी कहा कि शुक्रवार को नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की अनुमानित संख्या जिलाधिकारी को उपलब्ध करा दी जाएगी।

केंद्र सरकार और एएसआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन कानून व्यवस्था का ध्यान रखेगा।

उच्च न्यायालय ने मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा दायर उस अपील का भी निस्तारण कर दिया, जिसमें परिसर के ‘‘वैज्ञानिक सर्वेक्षण’’ संबंधी मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के 11 मार्च 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी।

उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीशों में से किसी एक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ द्वारा की जाए।

यह देखते हुए कि एएसआई ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा कर लिया है और अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में उच्च न्यायालय को सौंप दी है, शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह रिपोर्ट को सार्वजनिक करे और संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराए, जो इस पर आपत्ति दाखिल कर सकते हैं।

पीठ ने कहा कि आपत्तियां दाखिल की जाएं और उसके बाद मामले को अंतिम सुनवाई के लिए लिया जाए।

शीर्ष अदालत ने कहा कि जब तक याचिका पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, सभी पक्ष घटनास्थल पर यथास्थिति बनाए रखें और वे एएसआई के आदेश का पालन करना जारी रखेंगे। (भाषा)


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