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अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की गिनती शुरू
19-Jan-2026 12:51 PM
अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की गिनती शुरू

300 ट्रैप कैमरे लगे, एक फरवरी को पूरा होगा पहला चरण

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 19 जनवरी। छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) में एक बार फिर शाकाहारी और मांसाहारी वन्यप्राणियों के साथ बाघों की गणना की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके तहत ट्रैप कैमरे लगाने का काम तेज़ी से चल रहा है। पहले चरण की शुरुआत अचानकमार, छपरवा और लोरमी बफर रेंज से की गई है।

एटीआर को दो हिस्सों में बांटकर पहले चरण में 300 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। बीट गार्ड और अन्य वनकर्मी पैदल गश्त कर बाघों की गतिविधियों के संकेत तलाश रहे हैं। हालांकि बाघों को प्रत्यक्ष देखना जरूरी नहीं है, फिर भी कर्मचारी पूरी कोशिश कर रहे हैं। यह चरण फरवरी के पहले सप्ताह तक पूरा होने की संभावना है। गणना कार्य में देहरादून से आए प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ कर्मचारी भी सहयोग कर रहे हैं। वे कैमरा ट्रैपिंग और डेटा संग्रह को लेकर वन अमले को प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रबंधन के अनुसार वर्तमान में एटीआर में 18 बाघ होने का अनुमान है। पिछली गणना में बाघों की संख्या 14 थी, बाद में चार शावकों के जन्म के बाद यह आंकड़ा बढ़ा है। रिजर्व में कुल 108 बीट हैं, जहां स्टाफ बाघों के विचरण क्षेत्र की पहचान कर रहा है।

पहले चरण के कैमरों से मिले सभी डेटा को एक फरवरी के बाद निकालकर देहरादून स्थित मुख्यालय भेजा जाएगा। डेटा मिलान के बाद ट्रांजिट लाइन पर पैदल साइन सर्वे किया जाएगा। इसके बाद शेष क्षेत्रों में 344 और ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे और 15 फरवरी से दूसरा चरण शुरू होगा।

जानकारी के अनुसार एटीआर में चार साल में एक बार मुख्य बाघ गणना होती है, जबकि साल में दो बार फोर फेस मॉनिटरिंग की जाती है। यह प्रक्रिया नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के निर्देशों के तहत गर्मी और सर्दी दोनों मौसमों में पूरी की जाती है। सबसे अहम भूमिका कैमरा ट्रैपिंग की होती है।

कोर जोन में ग्रीन चिन्हित स्थानों पर ही ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, ताकि बाघ या अन्य वन्यप्राणी गुजरते ही उनकी तस्वीर स्वतः कैद हो सके।


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